Bhartiya Samvidhan Sabha Ka Pahla Adhiveshan Kab Hua

Bhartiya Samvidhan Sabha Ka Pahla Adhiveshan Kab Hua – संविधान सभा का पहला अधिवेशन 09 दिसंबर 1946 को दिल्ली मे हुआ था !

और इसका अंतिम बैठक 24 जनवरी 1950 को हुआ था। साथ ही उसी दिन संविधान सभा द्वारा भारत का पहला राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद को चुना गया था।

भारत का संविधान (Constitution of India) दुनिया का सबसे लम्बा संविधान है जिसके आधार पर भारत के नागरिक और सभी तरह क्षेत्र तंत्र पर शासन चलाया जाता है। भारत का लिखित संविधान 26 नवंबर 1949 को बनकर तैयार हुआ था,

जिसके याद में हर साल इस दिन संविधान दिवस के रूप में याद किया जाता है। जिसमें जरूरत पड़ने पर संविधान में संसोधन किया जाता रहा है। इसी के अंतर्गत देश, कानून व्यवस्था और शासन इत्यादि चलता आ रहा है।

बेशक भारत को अंग्रेजों से 15 अगस्त 1947 को आजादी मिल गई थी, लेकिन देश अब तक पूरी तरह से फ्रांस और पृतगाल से स्वतंत्र नही हुआ था। ब्रिटिश हुकूमत का कहना था कि जब तक भारत का अपना संविधान बनकर तैयार नही हो जाता है,

तब तक इसे ब्रिटिश कानून से चलाया जायेगा। इस तरह भारत के विद्वानों ने मिलकर हिंदुस्तान का अपना संविधान को लिखने लगे, जिसमें संविधान निर्माण की प्रक्रिया में 2 साल 11 महीने और 18 दिन लगे। इस काम में लगभग 6.4 करोड़ रुपये खर्च हुए थे।

भारत के संविधान के बारें में इंटरनेट पर अक्सर भारतीय संविधान सभा का पहला अधिवेशन कब हुआ भारतीय संविधान सभा का गठन (Constituent Assembly) के बारें में सर्च करते रहते है। उन लोगों के लिए यह ब्लॉग लेख महत्वपूर्ण साबित होगी, जिसमें इससे संबन्धित सभी चीजों को बारीकी से बताया गया है।

 

Bhartiya Samvidhan Sabha Ka Pahla Adhiveshan Kab Hua
Bhartiya Samvidhan Sabha Ka Pahla Adhiveshan Kab Hua

 

संविधान सभा क्या है – What is Constituent Assembly in Hindi

इस तरह के सभा का पहला गठन देश स्वतंत्र होने से पहले 06 दिसंबर 1946 को संविधान निर्माण के लिए किया गया था। जिसमें यह सुनिश्चित करना था कि देश के स्वतंत्र होने के बाद उसके नागरिक और शासन तंत्र पर किसका शासन होगा।

संविधान सभा का कार्य के रूप में संविधान का निर्माण करना और जब तक संसद का गठन नही हो जाएँ, तब तक संसद के रूप में कार्य करना शामिल है।

 

संविधान की परिभाषा – What is Constitution in Hindi

यह एक प्रकार का किसी भी देश पर चलाया जाने वाला शासन प्रणाली होती है, जिसके अंतर्गत किसी भी देश की कानून-व्यवस्था तथा सरकार और नागरिक के बीच संबंध स्थापित करना होता है। जिसमें उसके विभिन्न अंगों को शामिल किया जाता है।

दूसरे शब्दों में कहे तो संविधान लिखित नियमों का एक ऐसा ग्रंथ या किताब होता है, जिसे किसी क्षेत्र या देश में रहने वालें नागरिक के बीच आपसी संबंध तय होने के साथ-साथ लोगों और सरकारों के बीच में संबंध स्थापित करना होता है।

संविधान सम् + विधान शब्द से मिलकर बना है। विकिपीडिया के अनुसार संविधान वह विधि है जो किसी राष्ट्र के शासन का आधार है उसके चरित्र, संगठन को निर्धारित करती है तथा उसके प्रयोग विधि को बताती है।

यह राष्ट्र की परम विधि है तथा विशेष वैधानिक स्थिति का उपभोग करती है सभी प्रचलित कानूनों को अनिवार्य रूप से संविधान की भावना के अनुरूप होना चाहिए यदि वे इसका उल्लंघन करेंगे तो वे असंवैधानिक घोषित कर दिए जाते है।

 

भारतीय संविधान सभा का पहला अधिवेशन कब हुआ – Constitution of India Wikipedia

संविधान सभा का पहला अधिवेशन (Conference) यानि बैठक 09 दिसंबर 1946 को दिल्ली में हुआ था जिसमें 389 सभा के सदस्यों को बुलाया गया था, जिनमें 4 चीफ कमिश्नर क्षेत्रों के सदस्य 93 देशी रियासतों के सदस्य तथा 292 ब्रिटिश प्रांतों के प्रतिनिधि शामिल थे।

तो वही संविधान सभा का अंतिम अधिवेशन 24 जनवरी 1950 को हुआ था जिसके अगले दो दिन बाद भारत पर एक नये भारतीय संविधान को लागू कर दिया गया था।

जिनमे 395 आर्टिकल और 12 अनुसूचियाँ शामिल है जो दुनिया का सबसे लंबा संविधान है।

आपको बताते चले संविधान सभा का प्रथम अस्थाई अध्यक्ष डॉ. सच्चिदानंद सिन्हा को सभी सदस्यों के अनुरोध पर बनाया गया था जो उस समय के सभा में सबसे बुजुर्ग व्यक्ति थे, लेकिन बाद में पहला राष्ट्रपति डॉ राजेंद्र प्रसाद को भारतीय संविधान सभा के अध्यक्ष के रूप में स्थायी पद दिया गया था।

जिसमें कांग्रेस के 208, मुस्लिम लीग के 73 स्थान एवं 15 अन्य दलों के तथा स्वतंत्र सदस्य उम्‍मीदवार को निर्वाचित किया गया था। साथ ही जब Bharat Ke Sanvidhan Ka Pahla Adhiveshan हुआ था उस दौरान मुस्लिम लीग ने इसका विरोध कर पाकिस्तान के लिए एक अलग संविधान सभा की मांग किया था।

संविधान सभा की प्रथम माँग बाल गंगाधर तिलक के द्वारा 1895 में स्वराज विधेयक के द्वारा की गयी थी जिसके बाद 1938 में इसका स्थापना निर्णय लिया गया। जिसके बाद 6 दिसम्बर 1946 में इसका गठन हुआ और 9 दिसम्बर 1947 से अपना कार्य आरम्भ किया गया।

जिसमे 299 सदस्य थे, लेकिन देश आजाद होने से पहले सदस्यों की संख्या 389 थी, लेकिन भारत पाकिस्तान विभाजन के फलस्वरूप इसकी संख्या घटकर 299 रह गया था।

जिसमें 229 संविधान सभा सदस्यों का चयन चुनाव के जरिये किया गया था और बचे 70 सदस्यों को उन्हीं 299 सदस्यों के द्वारा किया गया, जिसमें 15 महिलाएं भी शामिल थी।

 

संविधान सभा के सत्र – Total Constituent Assembly session

भारत के संविधान सभा का प्रथम सत्र 9 से 23 दिसंबर 1946 के बीच चला था। जिसमें इसकी शुरुआती सत्र से लेकर पूरे 11 सत्र पूरे होते-होते लिखित संविधान बनकर तैयार हो चुका था।

पहला सत्र 9 – 23 दिसंबर 1946
दूसरा सत्र 20 – 25 जनवरी 1947
तीसरा सत्र 28 अप्रैल – 2 मई 1947
चौथा सत्र 14 – 31 जुलाई 1947
पांचवा सत्र 14 – 30 अगस्त 1947
छठा सत्र 27 जनवरी 1948
सातवाँ सत्र 4 नवंबर 1948 – 8 जनवरी 1949
आठवाँ सत्र 16 मई – 16 जून 1949
नौवाँ सत्र 30 जुलाई – 18 सितंबर, 1949
दसवां सत्र 6-17 अक्टूबर 1949
ग्यारहवां सत्र 14-26 नवंबर 1949

 

संविधान सभा के सदस्यों की सूची – List of Members of the Constituent Assembly

भारत के संविधान बनाने में 299 विद्वानों का हाथ है जिन्होने हर बात पर ध्यान केन्द्रित करते हुये उन्हे इस तरह से लिखा

जिस पर आज तक देश की कानून-व्यवस्था चलते आ रहा है। दरअसल देश का संविधान 26 नवंबर 1949 को बनकर तैयार हो गया, लेकिन इसे 2 महीने बाद 26 जनवरी 1950 को लागू किया था।

अगर हम भारत के संविधान के वास्तविक किताब की बात करे तो उसका वजन लगभग 13 किलों का है। जिस पर 284 लोगों का ही हस्ताक्षर है, क्योंकि जब इसकी लिखावट की शुरुआत वर्ष 1946 से किया गया था तब से लेकर 1950 तक कुछ लोगों की मृत्यु हो गई थी।

देश को संविधान देने में कूल 299 सदस्यों का योगदान है, लेकिन इसमें सबसे ज्यादा योगदान डॉ भीम राव अंबेडकर, सरदार वल्लभ भाई पटेल इत्यादि लोगों का है जिनके सदस्यों की सूची नीचे दिया गया है: –

पंडित जवाहर लाल नेहरू डॉ भीम राव अंबेडकर
सरदार वल्लभ भाई पटेल डॉ राजेंद्र प्रसाद
आचार्य जे बी कृपलानी सरोजिनी नायडू
श्यामा प्रसाद मुखर्जी मौलाना अबुल कलाम आजाद
गोविंद वल्लभ पंत शरत चंद्र बोस
सी राजगोपालाचारी डॉं. सच्चिदानंद सिन्हा
दुर्गाबाई देशमुख पट्टाभि सीतारमैया
ए कृष्णास्वामी अय्यर बी पट्टाभि सीतारमैया
के एम मुंशी जी वी मावलंकर
अमिय कुमार घोष कमलेश्वरी प्रसाद यादव
एच सी मुखर्जी गोपीनाथ बारदोलोई
ए वी ठक्कर बी एल मित्तर
सैयद मोहम्मद सादुल्लाह डी पी खैतान
बी एन राव माधव राव
टी टी कृष्णमाचारी एन गोपालस्वामी अयंगर
श्री हरे कृष्ण महताब एम आसफ अली

 

भारतीय संविधान बनाने में देश के भिन्न राज्य और क्षेत्रों से विद्वानों को इसमें सम्मिलित होने के लिए बुलाया गया था। दरअसल, ब्रिटिश राज से पहले भारत में कोई राज्य नहीं था,

स्वतंत्रता के बाद भारत में मैसूर, पंजाब, मद्रास, बॉम्बे, उड़ीसा, बंगाल, संयुक्त प्रांत, मध्य प्रांत, असम, राजस्थान और जम्मू-कश्मीर राज्य थे। जिसमें उस समय के अनुसार इस सभा में शामिल हुये सदस्यों की संख्या उस क्षेत्र का सूची दिया गया है।

राज्य/क्षेत्र संविधान सभा के सदस्यों की संख्या
मद्रास 52
बॉम्बे राज्य 29
पश्चिम बंगाल 21
संयुक्त प्रांत 57
पूर्वी पंजाब 15
बिहार 38
मध्य प्रान्त और बरार 24
असम 8
उड़ीसा 13
दिल्ली 1
राजस्थान 12
कुर्ग 1
मैसूर (कर्नाटक) 7
जम्मू एवं कश्मीर 4
केरल 7
मध्य भारत 7
सौराष्ट्र 5
विन्ध्य प्रदेश 4
कूचबिहार 1
त्रिपुरा और मणिपुर 2
भोपाल 1
कच्छ 1
हिमाचल प्रदेश 1

 

हमें संविधान की आवश्यकता क्यों है

किसी भी देश को सही तरीके से चलाने के लिए संविधान की जरूरत पड़ती है। यह लोगों को नियमों के दायरे में रहकर कार्य करने की आजादी देता है हालांकि दुनिया में इंग्लैंड, न्यूजीलैंड, कनाडा, इजरायल इत्यादि देश भी है

जिनका अपना लिखित संविधान नही है फिर भी वह राष्ट्र देश-दुनिया में प्रगति कर रहें है, लेकिन भारत का संविधान लिखित है। लोकतांत्रिक देश को संविधान की आवश्यकता निम्नलिखित कारणों से पड़ती है:-

  • संविधान अच्छे समाज के गठन के लिए लोगों की आकांक्षाओं को व्यक्त करता है।
  • यह सभी जाति-धर्म और समुदाय, क्षेत्रों के लोगों को एक सामान अधिकार प्रदान करता है।
  • साथ ही देश में रह रहें नागरिक के बीच भरोसा और सहयोग पैदा कर सरकार के साथ आपसी संबंधो को निर्धारित भी करता है।
  • संविधान से स्पष्ट होता है कि सरकार का गठन कैसे और किसके फैसले लेने का अधिकार है।
  • साथ ही यह सरकारों और नागरिकों के अधिकारों की सीमा तय करता है और उन्हे बताता है कि उनका क्या अधिकार है।
  • नागरिकों के मौलिक अधिकारों की रक्षा संविधान ही करता है।
  • जिस प्रकार से किसी संस्था को चलाने के लिए उस संस्था के लोगों द्वारा कुछ कायदे कानून बनाए जाते हैं उसी प्रकार से देश को चलाने के लिए संविधान की आवश्यकता होती है।

 

संविधान सभा के कार्य – Functions of the Constituent Assembly

जब भारतीय संविधान का प्रथम अधिवेशन हुआ था जिसमें कई महत्वपूर्ण बिन्दु को शामिल कर उस पर कार्य करना था जिसके बारें में बताया गया है: –

  • भारत के एक लिखित संविधान को तैयार करना।
  • अधिनियमित कानूनों को निर्णय लेने की प्रक्रिया में शामिल करना।
  • जिसमें 22 जुलाई 1947 को राष्ट्रीय ध्वज को अपनाया गया।
  • 24 जनवरी 1950 को संविधान में राष्ट्रीय गीत को अपनाया गया।
  • इसने मई 1949 में ब्रिटिश राष्ट्रमंडल में भारत की सदस्यता को स्वीकार कर मंजूरी दे दी थी।
  • देश आजाद होने के लगभग तीन साल बाद 24 जनवरी 1950 को भारत के प्रथम राष्ट्रपति के रूप में डॉ राजेन्द्र प्रसाद को चुना गया था।

 

FAQ’s – Bhartiya Samvidhan Sabha Ka Pahla Adhiveshan Kab Hua in Hindi

सवाल : संविधान सभा का गठन कब हुआ

Bharat ke Sanvidhan का गठन 6 December 1946 को हुआ था।

सवाल : संविधान सभा के अध्यक्ष कौन थे

जब देश के संविधान लिखने के लिए प्रथम सत्र बुलाया गया था तब सभी सदस्यों की सहमति से उस सभा के उस समय के सबसे बुजुर्ग व्यक्ति में से एक डॉ. सच्चिदानंद सिन्हा को अस्थाई सभा का अध्यक्ष बनाया था, जिसके बाद डॉ राजेंद्र प्रसाद संविधान सभा अध्यक्ष बने थे।

सवाल : संविधान सभा की दूसरी बैठक कब हुई

इसका दूसरी बैठक सत्र 20 जनवरी से 25 जनवरी 1947 तक चला था। जिसमें स्थाई अध्यक्ष डॉ. राजेन्द्र प्रसाद को बनाया गया।

सवाल : भारतीय संविधान सभा का पहला अधिवेशन कब हुआ

संविधान सभा का पहला अधिवेशन 9 दिसंबर 1946 मे दिल्ली मे हुआ था। संविधान सभा की प्रथम बैठक नई दिल्ली स्थित काउंसिल चैम्बर के पुस्तकालय भवन में हुई थी।

सवाल : संविधान सभा का अंतिम अधिवेशन कब हुआ

भारतीय संविधान सभा की अंतिम बैठक यानि अधिवेशन 24 जनवरी 1950 को हुई थी और उसी दिन उस सभा के द्वारा डॉ. राजेंद्र प्रसाद को भारत का प्रथम राष्ट्रपति के रूप में चुना गया था। तो वही अंतिम सभा सत्र 14-26 नवंबर 1949 को हुआ था।

सवाल : संविधान सभा की पहली बैठक में कितने सदस्य थे

हालांकि इसमें सदस्यों की संख्या 389 थी, लेकिन मुस्लिम लीग के सभा और संविधान के विरोध होने के कारण इसमें पहली बैठम में 207 सदस्यों ने ही भाग लिया था।

सवाल : संविधान सभा की मांग सर्वप्रथम किसने की

भारतीय संविधान सभा निर्माण की सर्वप्रथम मांग बाल गंगाधर तिलक द्वारा 1895 में स्वराज विधेयक के  द्वारा की किया गया था। जिसके बहुत वर्ष गुजर जाने के बाद इस पर काम करना शुरू किया गया था।

सवाल : संविधान सभा का निर्माण किसने किया था

दरअसल संविधान सभा का निर्माण किसी एक व्यक्ति ने नही किया था, लेकिन संविधान निर्माण का सबसे ज्यादा श्रेय डॉ भीम राव अंबेडकर जी को जाता है साथ ही उन सभी सदस्यों को भी जाता है, जिन्होने 2 वर्ष 11 माह 18 दिन में भारत का संविधान लिख दिया था।

 

Conclusion

इस ब्लॉग लेख में आपने भारतीय संविधान सभा का गठन कब हुआ था के बारें में जाना। आशा करते है आप Bhartiya Samvidhan Sabha Ka Pahla Adhiveshan Kab Hua की पूरी जानकारी जान चुके होंगे।

अगर आपका इससे संबन्धित किसी भी तरह का सवाल है तब नीचे कमेन्ट में पूछ सकते है जिसका जवाब जल्द से जल्द दिया जायेगा।

आपको लगता है कि इसे दूसरे के साथ भी शेयर करना चाहिए तो इसे सोश्ल मीडिया पर सबके साथ इसे साझा अवश्य करें। शुरू से अंत तक इस लेख को पढ़ने के लिए आप सभी का तहेदिल से शुक्रिया…

Leave a Comment