Kya Rashtriya Samman Ka Pratik Hai – राष्ट्रीय सम्मान का प्रतीक क्या है

Kya Rashtriya Samman Ka Pratik Hai : आज विश्व भर में कुल देशों की संख्या 200 से भी ज्यादा है और प्रत्येक देश का एक राष्ट्र चिन्ह है जिसे की राष्ट्रीय सम्मान के नाम से भी जाना जाता है क्योंकि प्रत्येक देश की पहचान उसके झंडे और उसके राष्ट्रीय प्रतीक से ही की जाती हैं

उदाहरण के तौर पर पाकिस्तान की पहचान उसके झंडे से की जाती है जिसमें की हरा रंग और एक चांद सितारा है

वहीं भारत की पहचान उसके झंडे तिरंगे से की जाती हैं जिसमें की केसरिया, हरा और सफेद रंग विद्यमान है तथा इसके मध्य में एक अशोक चक्र हैं जो कि हमारी निरंतर प्रगति को दर्शाता है

तो अब आप सोच रहे होंगे कि भारत का राष्ट्रीय सम्मान का प्रतीक क्या है और यह कैसा दिखता है तथा भारत ने इस राष्ट्रीय सम्मान को किस प्रकार से अपनाया था

इन सभी प्रश्नों का जवाब आपको आज के इस लेख में मिल जाएगा तथा साथ ही हमारे आज के इस लेख का मुख्य विषय रहेगा Kya Rashtriya Samman Ka Pratik Hai

आमतौर पर राष्ट्रीय प्रतीक या राष्ट्रीय सम्मान किसी भी देश का वह अंग होता है जिससे वैश्विक स्तर पर उसकी पहचान की जाती हैं और इसी प्रतीक से उस देश की संस्कृति तथा उसके एटीट्यूट की भी पहचान हो जाती हैं

 

Kya Rashtriya Samman Ka Pratik Hai

 

Kya Rashtriya Samman ka Pratik Hai

भारत के राष्ट्र सम्मान का प्रतीक अशोक चक्र हैं जो कि हमारे भारतीय ध्वज तिरंगे के मध्य में स्थित हैं यह अशोक चक्र हमें निरंतर आगे बढ़ने की सीख प्रदान करता है, क्योंकि इसमें कुल 24 तिलिया हैं जो कि समय के आगे बढ़ने का प्रतीक मानी जाती हैं

इसके अलावा भारत में अशोक स्तंभ को भी राष्ट्र सम्मान का प्रतीक माना जाता है और इसी अशोक स्तंभ में यह अशोक चक्र भी विद्यमान है

जब हम इस संपूर्ण अशोक स्तंभ को देखते हैं तो इसमें चार दिशाओं में खड़े हुए चार शेर हमें दिखाई देते हैं और इन 4 शेरों द्वारा हमें भारत की छवि भी प्रकट होती हुई दिखाई देती है

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 Note : इस अशोक स्तंभ को देखने पर आपको केवल अगले भाग में स्थित तीन शेर ही दिखाई देंगे परंतु एक शेर का मुंह पीछे होता है और इसी के साथ अशोक स्तंभ में कुल 4 शेर होते हैं 

इन चारों शेरों के नीचे एक पट्टी का पर हमें अशोक चक्र दिखाई देता है जिसके दाएं और एक घोड़ा तथा बैल और एक वृषभ होता है

अशोक चक्र में 24 तिलिया विद्यमान होती हैं और यह 24 दिन का समय के 24 घंटों को दर्शाती हैं साथ ही इस प्रकार से दिखाई देती है जैसे यह निरंतर चल रही हो और कई विशेषज्ञों द्वारा इसकी तुलना रथ के पहिए से भी की जाती हैं

क्योंकि रथ का पहिया भी निरंतर चलता रहता है और वह भी कहीं ना कहीं प्रगति का ही सूचक होता है

वहीं दूसरी और अशोक स्तंभ में मौजूद घोड़ा हमें चुस्ती फुर्ती का परिचय देता है तथा इसमें मौजूद बैल हमें शक्ति का परिचय प्रदान कराता है

अशोक स्तंभ में मौजूद चारों शेर हमारे प्यारे भारत की छवि को निडर बनाते हैं और संपूर्ण दुनिया को यह परिचय देते हैं कि भारत की संप्रभुता और अखंडता के लिए भारत इन शेरों के समान भी जवाब दे सकता है

अशोक स्तंभ को भारत सरकार द्वारा 26 जनवरी 1950 को अपनाया गया था और उसी दिन से यह भारत सरकार के प्रत्येक पत्रावली तथा औपचारिक तथा अनौपचारिक कार्यों में प्रयोग किया जाता है

हालांकि भारत सरकार द्वारा इस पूर्ण अशोक स्तंभ को ना अपनाते हुए केवल इसके सामने वाले भाग को ही अपनाया गया है जिसमें कि हमें तीन शेर दिखाई देते हैं जो एक दूसरे की पीठ के सहारे खड़े हुए हैं

आज आप जितने भी अर्ध शासकीय या शासकीय पत्रों को देखते हैं तो उसमें आपको यह अशोक स्तंभ तथा भारत के अन्य राष्ट्रीय प्रतीक जरूर देखने को मिल जाते होंगे

अशोक स्तंभ की पट्टिका पर सबसे नीचे हिंदी भाषा की देवनागरी लिपि में “सत्यमेव जयते” लिखा हुआ है, जिसका अर्थ होता है कि सत्य की सदैव जीत होती हैं और इस प्रसिद्ध वाक्य को भारत के मुंडको  उपनिषद से लिया गया है

तो अब आप इस प्रकार से Kya Rashtriya Samman Ka Pratik Hai से चित्र परिचित हो गए होंगे


राष्ट्रीय सम्मान के कुछ अन्य प्रतीक

 

Some other symbols of national honor india

 

 

आप हर जगह पर केवल अशोक स्तंभ को ही देखते हैं इसलिए आपको यह लग सकता है कि भारत के राष्ट्र सम्मान का प्रतीक  अशोक स्तंभ भी हैं

परंतु ऐसा नहीं है हम आपकी जानकारी के लिए बता दें कि अशोक स्तंभ के अलावा भी कई ऐसे राष्ट्रीय सम्मान के प्रतीक हैं जो की भारत सरकार द्वारा इस्तेमाल किए जाते हैं और भारत के हर नागरिक का यह कर्तव्य है कि उनका सम्मान करें

कुछ अन्य राष्ट्रीय सम्मान के प्रतीक निम्नलिखित हैं :

  • भारत का राष्ट्रीय ध्वज

भारत का राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा है जिसे कि संविधान सभा द्वारा 22 जुलाई 1947 को अपनाया गया था और इसके लिए संविधान में एक झंडा समिति का निर्माण भी किया गया था

इसमें कुल 3 पटिया हैं जिनमें से सबसे ऊंची पट्टी पर केसरिया रंग तथा मध्य पट्टी पर सफेद रंग एवं सबसे निचली पट्टी पर हरा रंग हमें दिखाई देता है तथा इसके मध्य में अशोक चक्र भी विद्यमान है


  • भारत का राष्ट्रीय गान

प्रत्येक देश का एक राष्ट्रीय गान होता है जिसे राष्ट्र के राष्ट्रीय पर्व और उत्सवों पर गाया जाता है तो उसी प्रकार से भारत का भी एक राष्ट्रगान है जोकि जन गण मन है

भारत के राष्ट्रीय गान के रचयिता रविंद्र नाथ टैगोर हैं और इसे संविधान सभा द्वारा 24 जनवरी 1950 को अपनाया गया था

राष्ट्रीय गाने को पूर्ण गाने का समय 52 सेकंड है किंतु कुछ अवसरों पर इसे संक्षिप्त रूप में भी गाया जा सकता है जिसे गाने का समय 20 सेकंड होता है


  • भारत का राष्ट्रीय चिन्ह

भारत का राष्ट्रीय चिन्ह अशोक स्तंभ हैं जिससे कि भारत सरकार द्वारा अपने सभी कार्यों में प्रयुक्त किया जाता है तथा वैश्विक स्तर पर भारत की पहचान इसी राष्ट्रीय चिन्ह से की जाती है


  • राष्ट्रीय पंचांग या कैलेंडर

आज हम जिस कैलेंडर के सहारे दिनांक को की गणना करते हैं वह शक संवत पर आधारित हैं जिसे की  78 ईसवी में शुरू किया गया था

यही शक संवत आधारित पंचांग हमारे भारत का राष्ट्रीय पंचांग या कैलेंडर भी माना जाता है

भारत सरकार ने अपने सरकारी कामकाज के लिए इस कैलेंडर को 22 मार्च 1957 को राष्ट्रीय पंचांग के रूप में अपनाया था


  • राष्ट्रीय भाषा

भारत की कोई भी राष्ट्रीय भाषा नहीं है और अगर आप हिंदी को राष्ट्रभाषा कहते हैं तो आप एक अपराध कर रहे हैं क्योंकि हिंदी भारत की राष्ट्रभाषा ना होकर भारत की राजभाषा कहलाती हैं

भारतीय संविधान की आठवीं अनुसूची में कुल 22 भाषाएं विद्यमान है जो कि भारत में अलग-अलग हिस्सों में बोली जाती है


  • राष्ट्रीय गीत

भारत का राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम है जिसे बंकिम चंद्र चटर्जी द्वारा रचा गया था और इसे भारतीय संविधान सभा द्वारा 24 जनवरी 1950 को मान्यता प्रदान की गई थी

इस गीत को सबसे पहले 1896 में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के अधिवेशन में गाया गया था और यहीं से इसे राष्ट्रीय गीत के रूप में जाना गया

इसके अलावा भी भारत के कुछ अन्य और राष्ट्रीय प्रतीक हैं जैसे कि राष्ट्रीय फल, राष्ट्रीय फूल, राष्ट्रीय वृक्ष, राष्ट्रीय पशु, राष्ट्रीय पक्षी, राष्ट्रीय खेल, राष्ट्रीय जलीय जीव, राष्ट्रीय मुद्रा इत्यादि


राष्ट्रीय प्रतीकों को अपनाने के कारण

  • यह राष्ट्रीय सम्मान के प्रत्येक किसी भी देश की छवि के परिचायक होते हैं जो कि उसे वैश्विक स्तर पर पहचान प्रदान कराते हैं
  • विभिन्न राष्ट्रीय प्रतीकों को इसलिए भी अपनाया जाता है क्योंकि उस देश के नागरिकों द्वारा उन प्रतीकों के प्रति सम्मान व्यक्त किया जाए और उनका आदर किया जाए
  • अलग-अलग प्रकार के राष्ट्रीय प्रतीकों को अपनाने से उस देश की एकता और अखंडता भी बढ़ती है तथा उस देश के विभिन्न क्षेत्रों में निवास करने वाले लोगों के मध्य समानता भी विकसित की जाती है
  • जब सभी नागरिक इन राष्ट्रीय प्रतीकों का सम्मान करेंगे तो इनके मध्य भात्रत्व का विकास होगा और यह एक दूसरे को अपने से अलग नहीं समझेंगे जिससे कि पूरे देश की अखंडता भी सुरक्षित रहेगी
  • प्रत्येक देश की सरकार को अपने सभी सरकारी कामकाज के लिए एक प्रतीक चिन्ह भी रखना होता है, जिस कारण से भी यह प्रतीक चिन्ह किसी देश द्वारा अपनाए जाते हैं
  • इन प्रतीक चिन्ह द्वारा विभिन्न पशु पक्षियों तथा पौधों की प्रजातियों का संरक्षण भी किया जाता है क्योंकि जब सरकार द्वारा विभिन्न प्रतीक चिन्हों में इनकी भूमिका को बढ़ाया जाएगा तो उस देश के नागरिकों द्वारा भी इन सब का संरक्षण करना अनिवार्य हो जाएगा
  • इन प्रतीक चिन्हों का प्रयोग उस राष्ट्र के विभिन्न प्रकार के दस्तावेजों पर भी किया जाता है जिससे कि यह पता लगता है कि वह दस्तावेज किस राष्ट्र का है, उदाहरण के तौर पर आज अशोक स्तंभ का प्रयोग हमारे भारत में आधार कार्ड से लेकर पासपोर्ट तक में किया जाता है

भारत में 23 राष्ट्रीय सम्मान प्रतीकों की सूची

आज वर्तमान में भारत में राष्ट्रीय सम्मान के प्रतीकों की कुल संख्या 23 हैं जो कि हो सकता है कि आने वाले समय में और भी ज्यादा बढ़ जाए

  • भारत का राष्ट्रीय ध्वज : तिरंगा
  • भारत का राष्ट्रीय गान : जन गण मन
  • भारत का राष्ट्रीय गीत : वंदे मातरम
  • भारत का राष्ट्रीय चिन्ह : अशोक स्तंभ
  • भारत का राष्ट्रीय पंचांग या कैलेंडर : शक संवत
  • भारत का आदर्श वाक्य : सत्यमेव जयते
  • भारत की राष्ट्रीयता : भारतीयता
  • भारत की राज भाषा : हिंदी
  • भारत की राष्ट्रीय लिपि : देवनागरी
  • भारत के राष्ट्रपिता : मोहनदास करमचंद गांधी
  • भारत की विदेशी नीति : गुटनिरपेक्षता की नीति
  • भारत का राष्ट्रीय पुरस्कार : भारत रत्न पुरस्कार
  • भारत का सूचना पत्र : श्वेत पत्र
  • भारत का राष्ट्रीय वृक्ष : बरगद
  • भारत का राष्ट्रीय फल : आम
  • भारत की राष्ट्रीय मुद्रा : भारतीय रुपया
  • भारत की राष्ट्रीय नदी : गंगा नदी
  • भारत का राष्ट्रीय पक्षी : मोर
  • भारत का राष्ट्रीय पशु : बाघ
  • भारत का राष्ट्रीय फूल : कमल
  • भारत की राष्ट्रीय योजना : पंचवर्षीय योजनाएं
  • भारत का राष्ट्रीय खेल : होगी
  • भारत की राष्ट्रीय मिठाई : जलेबी
  • भारत का राष्ट्रीय जलीय जीव : गंगा डॉल्फिन
  • भारत का राष्ट्रीय पकवान : सादी खिचड़ी
  • भारत के राष्ट्रीय पर्व : 1. 26 जनवरी को गणतंत्रता दिवस / 2. 15 अगस्त को स्वतंत्रता दिवस / 3. 2 अक्टूबर को महात्मा गांधी जयंती

FAQs : kya rashtriya samman ka pratik hai

सवाल : राष्ट्रीय samman का pratik क्या है

राष्ट्रीय सम्मान का प्रतीक अशोक चक्र है जो कि भारत के राष्ट्रीय ध्वज तथा अशोक स्तंभ में दिखाई देता है

सवाल : भारत के राष्ट्रीय सम्मान और प्रतीक अशोक स्तंभ को कहां से लिया गया है?

इस प्रतीक को महान राजा अशोक के सारनाथ स्तंभ से लिया गया है जोकि वर्तमान बिहार राज्य में स्थित है

सवाल : किसी भी देश के लिए राष्ट्रीय प्रतीक होना क्यों जरूरी है?

राष्ट्रीय प्रतीक के द्वारा किसी भी देश की पहचान वैश्विक स्तर पर की जाती हैं और यही उसका पहचान पत्र भी माना जाता है

सवाल : अशोक चक्र हमें क्या शिक्षा प्रदान करता है?

यह हमें जीवन में निरंतर प्रगति करने की शिक्षा देता है

सवाल : राष्ट्रीय सम्मान के प्रतीकों में कौन-कौन शामिल हैं?

किसी भी देश के राष्ट्रीय सम्मान के प्रतीकों में निम्नलिखित सम्मिलित होते हैं :

  • राष्ट्रीय चिन्ह या सम्मान
  • राष्ट्रीय ध्वज
  • राष्ट्रीय पशु
  • राष्ट्रीय पक्षी
  • राष्ट्रीय वृक्ष
  • राष्ट्रीय फूल
  • राष्ट्रीय फल
  • राष्ट्रीय भाषा
  • राष्ट्रीय पंचांग कैलेंडर

सवाल : भारत सरकार ने अशोक स्तंभ को कब अपनाने की मंजूरी प्रदान की थी?

भारत सरकार ने 26 जनवरी 1950 को अशोक स्तंभ को अपनाने की मंजूरी प्रदान की थी और उसी समय से यह राष्ट्रीय प्रतीक के रूप में इस्तेमाल किया जाता है

सवाल : भारत में कुल कितने राष्ट्रीय सम्मान के प्रतीक हैं?

भारत में कुल राष्ट्रीय सम्मान के प्रतीकों की संख्या 23 है


Conclusion 

आशा करते हैं कि आपको आज का हमारा यह लेख  Kya Rashtriya Samman Ka Pratik Hai बहुत ज्यादा पसंद आया होगा और इसे पढ़कर आपको राष्ट्रीय सम्मान क्या होता है और इसे किस प्रकार से चुना जाता है इत्यादि बातें समझ आ गई होंगी

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ताकि आगे आने वाले समय में हम आपके सुझावों के मुताबिक ही इसी प्रकार के ज्ञानवर्धक लेख आपके लिए लाते रहे और आपके ज्ञान में सकारात्मक वृद्धि करते रहें

इस लेख को पढ़ने के लिए आपका बहुत-बहुत आभार और धन्यवाद

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