Samajshastra ko English mein kya kahate hain

Samajshastra ko english mein kya kahate Hain : समाजशास्त्र मनुष्य के सामाजिक जीवन, समाजों का अध्ययन है

एक सामाजिक प्राणी की तरह स्वयं हमारा व्यवहार इसकी विषय वस्तु है समाजशास्त्र ऐसा कार्य करने वाला पहला विषय नहीं है

लोगों ने हमेशा से उस समाज और समूह को देखा और समझा है जिसमे वे रहते हैं यह सभी सभ्यताओं और युगों के दार्शनिकों, धार्मिक गुरुओं और विधिवेत्ताओं की पुस्तकों से स्पष्ट है

माना कि मनुष्य आदि काल से ही समाज में रहता आया है, परंतु अपने समाज और अपने स्वयं के अध्ययन में उसने काफी देर से रुचि लेना शुरू किया

सर्वप्रथम मनुष्य ने प्राकृतिक घटनाओं का अध्ययन किया अपने चारों ओर के पर्यावरण को समझने का प्रयास किया और अंत में स्वयं के अपने समाज के विषय में सोचना शुरू किया

यही कारण है कि पहले प्राकृतिक विज्ञान का विकास हुआ उसके बाद जाकर सामाजिक विज्ञानों का अध्ययन हुआ अपने जीवन और अपने समाज के बारे में सोचने वाला मानव स्वभाव केवल दार्शनिकों एवं सामाजिक विचारकों तक सीमित नहीं है

हम सभी के अपने रोजमर्रा की जिंदगी के बारे में और दूसरों की जिंदगी के बारे में भी अपने-अपने विचार में रहते हैं और इसी तरह अपने समाज और दूसरे समाजों के बारे में भी विचार रखते हैं

समाजशास्त्र आरंभिक काल से स्वयं को विज्ञान की तरह समझता आया है

समाजशास्त्र प्रचलित सामान्य बौद्धिक प्रेक्षणों, दार्शनिक अनुचिंतनो या ईश्वरवादी व्याख्यानों से हटकर वैज्ञानिक कार्य विधियों से बंधा हुआ है

इसका अर्थ है कि जिन कथनों पर समाजशास्त्री पहुंचता है वह कथन साक्ष्य के निश्चित नियमों के प्रेक्षणों द्वारा प्राप्त किए हुए होने चाहिए ताकि उन व्यक्तियों की जांच कर सके या उनकी जानकारियों के विकास हेतु उन्हें दोहरा सकें

जब एक समाजशास्त्रीय समाज का अध्ययन करता है तब वह जानकारियां इकट्ठा करने, परीक्षण करने को उत्सुक होता है

चाहे वह उसके निजी पसंद से प्रतिकूल ही क्यों ना हो आगे हम समाजशास्त्र के बारे में ही विस्तार से पढ़ेंगेे और हमारे आज के टॉपिक Samajshastra ko english mein kya kahate hain का भी जवाब देखेंगे

 

Samajshastra ko english mein kya kahate hain 
समाजशास्त्र को अंग्रेज़ी में क्या कहते हैं

 

Samajshastra ko english mein kya kahate hain  समाजशास्त्र को इंग्लिश में क्या कहते हैं

 समाजशास्त्र को इंग्लिश में सोशियोलॉजी Sociology कहते हैं इसका अर्थ मानव समाजों और सामाजिक व्यवहारों का अध्ययन करना है

समाजशास्त्र मुख्यतः दो शब्दों से मिलाकर बना है जिसमे पहला शब्द सोशियस (Socius) और दूसरा शब्द लोगस (logas) है

  • सोशियस का अर्थ है समाज
  •  लोगस का अर्थ है शास्त्र

इस प्रकार समाजशास्त्र का शाब्दिक अर्थ है कि समाज का शास्त्र या समाज का विज्ञान, समाजशास्त्र को आधुनिक जटिल समस्याओं का अध्ययन भी समझा जाता है

समाजशास्त्र की उत्पत्ति के मूल स्त्रोतों पर प्रकाश डालने के लिए गिंसबर्ग ने लिखा है कि समाजशास्त्र की उत्पत्ति राजनीतिक दर्शन, इतिहास, विकास के जैविक सिद्धांत एवं सभी सामाजिक और राजनीतिक सुधारों के आंदोलन पर आधारित है

जिसके अनुसार सामाजिक दिशाओं का सर्वेक्षण करना आवश्यक है स्पष्ट है कि समाजशास्त्र की उत्पत्ति में राजनीतिक दर्शन, इतिहास विकास के जैविक सिद्धांत तथा सामाजिक एवं राजनीतिक सुधार आंदोलनों का भी योगदान रहा है

इस पैराग्राफ को पढ़ने के बाद अब अगर हम आपसे पूछें कि Samajshastra ko english mein kya kahate hain  तो अब आप इसका जवाब आसानी से पाएंगे कि समाजशास्त्र को इंग्लिश में  सोशियोलॉजी कहते हैं


समाजशास्त्र की परिभाषा – Samajshastra ki Paribhasha

समाजशास्त्र को मानव समाज का अध्ययन कहा जाता है समाजशास्त्र सामाजिक विज्ञान की ही एक शाखा है

जो मानवीय सामाजिक संरचना और गतिविधियों से संबंधित जानकारी का विकास करने के लिए अनुभवजन्य विवेचन तथा विवेचनात्मक विश्लेषण के विभिन्न पद्धतियों का उपयोग करता है

इसका अध्ययन सामाजिक कल्याण के अनुसरण में अपने ज्ञान को लागू करना होता है

आजकल मनुष्य जो कुछ भी करता है वह सामाजिक समस्या या सामाजिक गतिविधि की श्रेणी के अंतर्गत आता है

धीरे धीरे समाजशास्त्र ने अपना ध्यान अन्य विषयों पर भी जैसे कि चिकित्सा से न्यायालय के संगठन जनसंपर्क और वैज्ञानिक ज्ञान के निर्माण में केंद्रित किया है

इस प्रकार सामाजिक वैज्ञानिक पद्धतियों की सीमा का भी काफी विस्तार हुआ है


भारत में समाजशास्त्र का विकास – Bharat me Samajshastra ka Vikas

उपनिवेशवाद आधुनिक पूंजीवादी एवं औद्योगीकरण का आवश्यक हिस्सा था इसलिए पश्चिमी समाज शास्त्रियों का पूंजीवाद एवं आधुनिक समाज के अन्य पक्षों पर लिखित दस्तावेज भारत में हो रहे है, सामाजिक परिवर्तन को समझने के लिए सर्वथा प्रासंगिक है

फिर भी जब हम शहरीकरण के संदर्भ में देखते हैं तो हमें पता चलता है कि उपनिवेशवाद में यह तथ्य निहित था कि आवश्यक नहीं है कि औद्योगीकरण का असर भारत में भी उतना ही था जितना पश्चिम में कार्ल मार्क्स के ईस्ट इंडिया कंपनी के प्रभाव को लेकर की गई टिप्पणियों से असमानता उजागर हुआ था

भारत में समाजशास्त्र को भारतीय समाज के बारे में पश्चिमी लेखकों द्वारा लिखित दस्तावेज और विचारों से भी जूझना पड़ता था जो हमेशा सही नहीं होते थे यह विचार अंग्रेज औपनिवेशिक अधिकारियों और पश्चिमी विद्वानों दोनों द्वारा व्यक्त किए गए थे

उनमें से बहुतों के लिए भारतीय समाज पाश्चात्य समाज के एकदम विपरीत था यहां हम केवल एक उदाहरण देते हैं कि एक भारतीय गांव को किस तरह से समझा गया और अपरिवर्तनीय रूप में चित्रित किया गया

औपनिवेशिक विरासत वाले देशों जैसे भारत में एक दूसरा साक्ष्य यह था कि यहां समाजशास्त्र और सामाजिक मनोविज्ञान में प्रायः अंतर किया जाता था एक स्तरीय पाश्चात्य पाठ्यपुस्तक में समाजशास्त्र की परिभाषा है

यह मानव समूहों और समाजों का अध्ययन है जिसमें औद्योगिककृत विश्व के विश्लेषण पर पर्याप्त बल दिया गया है

सामाजिक मनोविज्ञान की एक स्तरीय पाश्चात्य भाषा इस प्रकार होगी गैर पश्चिमी साधारण समाजों अर्थात दूसरी संस्कृति का अध्ययन भारत में इससे भी आगे सामाजिक मनोविज्ञान जिसमें पहले आदम लोगों के अध्ययन ने स्थान ले रखा था

 यही धीरे-धीरे बदल कर किसानों, सजातीय समूहों सामाजिक वर्गों, प्राचीन सभ्यताओं के विभिन्न पक्षों और विशेषताओं  के अध्ययन पर आ गया था

भारत में समाजशास्त्र एवं सामाजिक मानवविज्ञान के बीच कोई स्पष्ट विभाजक रेखा नहीं है 

यह बहुत सारे पाश्चात्य देशों में इन दोनों विषयों की एक विशेषता के रूप में मौजूद है शायद भारत में पाए जाने वाले आधुनिक एवं ग्रामीण एवं महानगरीय और परंपरागत अति विभिन्नता ही इसकी वजह है


समाजशास्त्र का विषय क्षेत्र और अन्य सामाजिक विज्ञानों से इसका संबंध-Samajshastra ka vishay shetra aur anya samajik vigyanon se iska sambandh

समाज शास्त्र के अध्ययन का विषय क्षेत्र काफी व्यापक है यह एक दुकानदार और ग्राहक के बीच एक अध्यापक और विद्यार्थी के बीच दो मित्रों के बीच अथवा परिवार के सदस्यों के बीच की अंतः क्रिया के विश्लेषण को अपना केंद्र बिंदु बना सकता है

इसी प्रकार यह राष्ट्रीय मुद्दों जैसे बेरोजगारी या जातीय संघर्ष या राज्य की नीतियों का जनजातियों के वानिकी संसाधनों पर अधिकार के प्रभाव व ग्रामीण कर्जों को अपना केंद्र बिंदु बना सकता है

अथवा वैश्विक सामाजिक प्रक्रियाओं जैसे लचीले श्रम कानूनों का श्रमिक वर्ग पर प्रभाव या इलेक्ट्रॉनिक माध्यम का नौजवानों प्रभाव या

विदेशी विश्वविद्यालयों के आगमन का देश की शिक्षा प्रणाली पर प्रभाव की जांच कर सकता है

इस प्रकार समाजशास्त्र विषय इससे परिभाषित नहीं होता कि वह क्या अध्ययन करता है, बल्कि इससे परिभाषित होता है कि वह एक चयनित क्षेत्र का अध्ययन कैसे करता है

समाजशास्त्र सामाजिक विज्ञानों के समूह का एक हिस्सा है जिसमें मानव विज्ञान अर्थशास्त्र राजनीति विज्ञान मनोविज्ञान एवं इतिहास शामिल है

विभिन्न सामाजिक विज्ञानों में विभाजन एकदम सुस्पष्ट नहीं है और सभी में कुछ हद तक सांझी रुचियां, संकल्पनाएं एवं पद्धतियां हैं

इसलिए यह समझा जाना जरूरी है कि कुछ विषयों में पृथकता कुछ हद तक स्वैच्छिक है और इस कि कठोरता से पालन नहीं होना चाहिए सामाजिक विज्ञान को अलग-अलग करना समानताओं पर आवरण चढ़ाने जैसा होगा

उदाहरण के लिए एक राजनीतिक विज्ञानी या अर्थशास्त्री राजनीति पर प्रभाव व परिवार के समाजशास्त्र के बगैर अर्थव्यवस्था पर आधारित श्रम विभाजन का अध्ययन नहीं कर सकता


समाजशास्त्र एवं अर्थशास्त्र – Samajshastra evam Arthshastra

अर्थशास्त्र वस्तुओं और सेवाओं के उत्पादन और वितरण का अध्ययन करता है शास्त्रीय आर्थिक उपागम पूर्ण रूप से आर्थिक चरों के अंतःसंबंधों का वर्णन करता है

कीमत मांग एवं पूर्ति का संबंध मुद्रा प्रवाह आगत और निर्गत का अनुपात और इसी तरह अन्य, परंपरागत अर्थशास्त्र के अध्ययन का केंद्र आर्थिक क्रियाकलाप के संकुचित दायरे तक रहा है

मुख्यतः किसी एक समाज में अपर्याप्त वस्तुओं एवं सेवाओं का वितरण

  • वे अर्थशास्त्री जो राजनीतिक आर्थिक उपागम से प्रभावित है
  • आर्थिक क्रियाकलापों को स्वामित्व के रूप में उत्पादन के साधनों के साथ संबंधों के विस्तृत दायरे में समझने का प्रयास करते हैं
  • आर्थिक विश्लेषण में प्रभावी प्रकृति का उद्देश्य किसी तरह से आर्थिक व्यवहार के सुरक्षित कानूनों का निर्माण करना था
  • समाजशास्त्रीय उपागम आर्थिक व्यवहार को सामाजिक मानकों मूल्य व्यवहारों और हितों के व्यापक परिपेक्ष्य में देखता है
  • विज्ञापन उद्योग में भारी निवेश का सीधा संबंध उपभोग के तरीकों और जीवनशैली को नया रूप देने की आवश्यकता से है
  • अर्थशास्त्र के अंदर की प्रवृतियां जैसे नारीवादी अर्थशास्त्री लिंग को समाज के केंद्रीय संगठनकारी सिद्धांत की तरह पेश कर इसके दायरे को बढ़ाना चाहते हैं
  • उदाहरण के लिए वे देखेंगे कि किस प्रकार घर पर किया गया कार्य बाहर के उत्पादकता से जुड़ा हुआ है
  • अर्थशास्त्र के परिभाषित विषय क्षेत्र ने इसको अत्यंत केंद्रित और विचारशील विषय के रूप में सुविधाजनक तरीके से विकसित होने में मदद की है

सामान्यता समाजशास्त्र अर्थशास्त्र के विपरीत तकनीकी समाधान प्रस्तुत नहीं करता बल्कि यह एक प्रश्नकारी एवं आलोचनात्मक दृष्टिकोण को प्रोत्साहित करता है


समाजशास्त्र एवं इतिहास-Samajshastra Ka Itihas

इतिहासकार एक तरह से नियम के मुताबिक अतीत का अध्ययन करते हैं जबकि समाजशास्त्री समकालीन समय या कुछ ही पहले के अतीत में ज्यादा रुचि रखते हैं

इतिहासकार पहले वास्तविक घटनाओं के चित्रण में एवं चीजें वास्तव में कैसे घटित हुई इसे स्थापित करने में संतुष्ट होते थे

जबकि समाजशास्त्र में असामयिक संबंधों को स्थापित करने पर ध्यान केंद्रित किया जाता था इतिहास ठोस विवरणों का अध्ययन करता है

जबकि समाजशास्त्र ठोस वास्तविकता से सार निकालकर उसका वर्गीकरण करता है आजकल इतिहासकार अपने विश्लेषण में समाजशास्त्रीय पद्धतियों एवं धारणाओं का उपयोग करने लगे हैं

परंपरागत इतिहास राजाओं और युद्धों के इतिहास के बारे में जानकारी देता रहा है इतिहासकारों द्वारा अपेक्षाकृत कम चकाचौंध

कम रोमांचक घटनाओं जैसे जमीन के संबंधों में परिवर्तन या परिवार में जेंडर संबंधों के इतिहास का अध्ययन परंपरागत रूप से कम ही हुआ है

लेकिन यही बात समाजशास्त्रियों की रूचि का प्रमुख क्षेत्र बने हालांकि आजकल इतिहास काफी हद तक समाजशास्त्रीय हो गया है

और सामाजिक इतिहास तो इतिहास की विषय वस्तु ही है यह शासकों के कार्यों युद्ध एवं राजतंत्रवाद के बजाय सामाजिक प्रतिमानों, लिंग संबंधों, लोकाचार,प्रथाओं एवं प्रमुख संस्थानों का अध्ययन करता है


समाजशास्त्र एवं राजनीति विज्ञान-Samajshastra evam Rajniti Vigyan

जैसा अर्थशास्त्र में है वैसे ही समाजशास्त्र और राजनीति विज्ञान के बीच भी पद्धतियों और उपागमों की परस्पर अंतःक्रिया की बहुलता है

परंपरागत राजनीति विज्ञान मुख्यतः दो तत्वों पर केंद्रित था-राजनीतिक सिद्धांत और सरकारी प्रशासन, दोनों में से किसी भी शाखा में राजनीतिक व्यवहार गहन रूप में शामिल नहीं है

सामान्यतः सैद्धांतिक भाग में प्लेटो से लेकर मार्क्स तक के सरकार संबंधी विचारों को केंद्र बिंदु बनाया गया है जबकि प्रशासनिक भाग का केंद्र बिंदु सरकार के वास्तविक संचालन की तुलना में इसका औपचारिक ढांचा रहा है

समाजशास्त्र समाज के सभी पक्षों के अध्ययन को समर्पित है

जबकि परंपरागत राजनीति विज्ञान ने अपने को शक्ति के औपचारिक संगठन के साकार रूप में अध्ययन तक सीमित रखा समाजशास्त्र सरकार सहित संस्थानों के समुच्य के बीच अंतःसंबंधों पर भी बल देता है जबकि राजनीति विज्ञान सरकार में विद्यमान प्रक्रियाओं पर ध्यान देता है

हालांकि समाजशास्त्र के अनुसंधान में समान रुचि को लेकर राजनीति विज्ञान से लंबी साझेदारी है मैक्स वेवर जैसे समाजशास्त्री ने ऐसा काम किया है

जिसको राजनीति समाजशास्त्र का नाम नहीं दिया जा सकता राजनीतिक समाजशास्त्र का क्षेत्र राजनीति व्यवहार के वास्तविक अध्ययन में रूप में बढ़ता जा रहा है

पिछले कुछ भारतीय चुनावों में भी मतदान के राजनीतिक प्रतिमान का काफी विशिष्ट अध्ययन देखने में आया है

राजनीतिक संगठनों की सदस्यता संगठनों में निर्णय लेने की प्रक्रिया राजनीतिक दलों के समर्थन के समाजशास्त्री कारण राजनीति में जाति एवं जेंडर की भूमिका आदि का भी अध्ययन किया जाता रहा है


समाजशास्त्र एवं मनोविज्ञान-Samajshastra evam Manovigyan

मनोविज्ञान को प्रायः व्यवहार के विज्ञान के रूप में भी परिभाषित किया जाता रहा है यह मुख्यतः व्यक्ति से संबंधित है यह उसकी बौद्धिकता एवं सीखने की प्रवृत्ति अभिप्रेरणाओं एवं याददाश्त, तंत्रिका प्रणाली एवं प्रतिक्रिया का समय आशाओं और डर में रुचि रखता है

सामाजिक मनोविज्ञान जो समाजशास्त्र और मनोविज्ञान के बीच एक पुल का कार्य करता है अपनी प्राथमिक रूचि एक व्यक्ति में रखता है

लेकिन उसका इस बात से सरोकार रहता है कि व्यक्ति किस प्रकार की सामाजिक समूहों में सामूहिक तौर पर अन्य व्यक्तियों के साथ व्यवहार करता है

समाजशास्त्र समाज में संगठित व्यवहार को समझने का प्रयास करता रहता है यही वह तरीका है जिससे समाज के विभिन्न पक्षों द्वारा व्यक्तित्व को आकार मिलता है

उदाहरण के लिए आर्थिक और राजनीतिक व्यवस्था उनका परिवार और नातेदारी संरचना उनकी संस्कृति मानक एवं मूल्य

यह याद रखना रुचिकर होगा कि दुर्खाइम जिन्होंने आत्महत्या के अपने प्रख्यात अध्ययन में समाजशास्त्र को स्पष्ट पद्धति एवं विषय क्षेत्र में स्थापित करने की चेष्टा की इसमें उन्होंने उन व्यक्तियों की व्यक्तिगत उत्कंठाओं की बाहर ही रखा है

जिन्होंने आत्महत्या की या इसकी चेष्टा की यह उन सांख्यिकी आंकड़ों के लिए किया गया था जो उन व्यक्तियों की कई सामाजिक विशेषताओं से लगाव रखते है

 

FAQs – Samajshastra ko English mein kya kahate hain 

सवाल : समाजशास्त्र की खोज कब हुई थी?

समाजशास्त्र की शुरुआत 1838 ईसवी में हुई परंतु भारत में समाजशास्त्र की शुरुआत 1940 में हुई

सवाल : समाजशास्त्र का जनक किसे कहा जाता है?

समाजशास्त्र का जनक अगस्त कॉमेट (Auguste Comte) को कहा जाता है

सवाल : भारत में समाजशास्त्र का जनक कौन है?

भारत में समाजशास्त्र के जनक गोविंद सदाशिव घुर्ये हैं

यह एक समाजशास्त्र के प्रोफेसर थे

सवाल : समाजशास्त्र किसका अध्ययन है?

समाजशास्त्र मनुष्य के सामाजिक जीवन का अध्ययन है

सवाल : समाजशास्त्र को इंग्लिश में क्या कहते हैं?

समाजशास्त्र को इंग्लिश में सोशियोलॉजी कहते हैं

 

Conclusion

उपर के आर्टिकल में हमने समाजशास्त्र,उसके इतिहास,समाजशास्त्र की परिभाषा और अन्य विज्ञानों के साथ उसके समायोजन के बारे में अत्यंत विस्तार से पढ़ा

तो जैसा कि सवाल था कि Samajshastra ko english mein kya kahate hain  तो इसका उत्तर है सोशियोलॉजी,हमे आशा है कि आपको हमारे द्वारा प्रदान की गई सारी जानकारियां पसंद आई होंगी और ये आपके लिए लाभदायक भी होंगी

 

Leave a Comment