Taj mahal kisne banaya tha – ताजमहल किसने और कब बनवाया था ?

Taj mahal kisne banaya tha : आज का हमारा विषय भारत के मध्यकालीन इतिहास से होने वाला है और वह भी मध्यकालीन इतिहास की स्थापत्य कला से।

जैसा कि आप सभी जानते हैं भारत में मुगलों द्वारा मध्यकाल में शासन किया गया था और अपने शासनकाल के दौरान इन मुगल शासकों द्वारा भारत में अनेक प्रकार के स्थापत्य नमूनों का निर्माण कराया गया था।

इनमें से कुछ अवशेष आज भी हमारे सामने मौजूद हैं, चाहे वह दिल्ली का लाल किला हो या फिर कुतुब मीनार या फिर अटूट प्रेम का जीता जागता उदाहरण ताजमहल

तो आज के इस लेख में हम भारत के सात अजूबे में से एक अजूबा याने उत्तरप्रदेश में स्थित ताजमहल के विषय पर बात करने वाले हैं इसके अलावा ताजमहल का इतिहास, रहस्य, निर्माण कितने सालों में बनकर हुआ जैसे तमाम महत्वपूर्ण सवालो पर चर्चा करेंगे

इससे जुड़ी अन्य कई रोचक जानकारियां जो शायद आज से पहले आपको ना पता हो। तो शुरू करते हैं आज के इस रोचक गुण और ज्ञान से भरपूर इस लेख को।

 

Taj mahal kisne banaya tha
Taj mahal kisne banaya tha

 

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ताजमहल किसने बनायाताजमहल किसने और कब बनवाया था ?था – Taj mahal kisne banaya tha

हम सभी जानते हैं कि भारत पर राज करने वाले मुगल शासकों द्वारा भारत में अनेक प्रकार की स्थापत्य कला कृतियों का निर्माण कराया गया था उनमें से एक कलाकृति है आगरा में स्थित ताजमहल।

इसे आज भी अटूट प्रेम का जीता जागता उदाहरण माना जाता है और लोगों द्वारा तो यह तक कहा जाता है कि अगर किसी से प्रेम करना हो तो ऐसा किया जाए कि मरने के बाद भी वह याद रहे और लोगों के सामने एक अटूट निशानी बनकर रहे।

तो इसी प्रकार के अटूट प्रेम की निशानी  ताजमहल का निर्माण मुगल शासक शाहजहां द्वारा कराया गया था 

अनेक सारे मुगल शासकों द्वारा भारत में समय-समय पर कई सारे महलों और इमारतों का निर्माण तो करवाया गया था, परंतु जो इमारत मुगल शासक शाहजहां द्वारा बनाई गई थी, वह सबसे अलग और सबसे नायाब आज तक भी मानी जाती हैं।

अनेक इतिहासकारों द्वारा इसे समय-समय पर अनेक प्रकार की उपमा उसे सुशोभित भी किया जा चुका है और आज भी किया जा रहा है।

 

ताजमहल कब बना था ? ताजमहल के निर्माण

अब आप यह तो जान गए होंगे कि ताजमहल का निर्माण मुगल शासक शाहजहां द्वारा कराया गया था परंतु क्या आप यह जानते हैं कि ताजमहल कब बना था और किसने बनवाया था अगर नहीं तो इसका निर्माण शाहजहां द्वारा सन 1632 में बनवाया था।

 

ताजमहल कब बना था
मुगल शासक शाहजहां

 

सबकी मुगल सम्राट शाहजहां का शासनकाल 1628 से लेकर 1658 ईसवी तक रहा था।

अपने इस 31 से 32 वर्ष के शासनकाल में शाहजहां द्वारा एक अजर अमर निशानी के रूप में ताजमहल का निर्माण करवाया गया था।

 

शाहजहां ने ताज महल का निर्माण किस की याद में बनाया था

 सन 1632 में मुगल सम्राट शाहजहां द्वारा अपनी रानी मुमताज की याद में इस ताजमहल का निर्माण करवाया गया था। 

शाहजहां अपनी बेगम मुमताज से बेइंतहा मोहब्बत करते थे परंतु शाहजहां की बेगम मुमताज की बेहद कम आयु में मृत्यु हो जाने के कारण शाहजहां को एक गहरा धक्का लगा क्योंकि

अभी तो शाहजहां ने अपने शासन की गद्दी संभाली ही थी कि अचानक उनकी सबसे प्रिय बेगम मुमताज इस दुनिया को छोड़ कर जा चुकी थी।

शाहजहां अपने व मुमताज के प्रेम को हमेशा हमेशा के लिए अमर बना देना चाहते थे और लोगों के सामने मिसाल पेश करना चाहते थे कि सच्ची मोहब्बत हो तो शाहजहां और मुमताज जैसी हो वरना मोहब्बत ही ना हो।

अपनी इसी मोहब्बत को एक ऊंचे पायदान पर ले जाने के ख्वाब से शाहजहां ने अपनी बेगम मुमताज की याद में इस हाथी दांत और सफेद संगमरमर से निर्मित ताजमहल का निर्माण आगरा में कराया था।

 

ताजमहल (Taj mahal)भारत के किस शहर में स्थित है

मुगल सम्राट शाहजहां द्वारा निर्मित ताजमहल वर्तमान उत्तर प्रदेश के शहर आगरा में स्थित है।

इस ताजमहल की स्थिति के कारण आज इस आगरा शहर की संपूर्ण अर्थव्यवस्था आगे बढ़ रही हैं।

हर साल हजारों लाखों पर्यटक देश विदेश से इस ताजमहल को देखने आगरा आते हैं और यहां की संस्कृति को अन्य क्षेत्रों में अपने साथ अपनी यादों में बांध कर ले जाते हैं।

 

ताज महल किस नदी के किनारे स्थित हैं 

सफेद संगमरमर से जगमगाता शाहजहां द्वारा निर्मित यह ताजमहल आगरा शहर में यमुना नदी के किनारे स्थित है।

यह ताजमहल यमुना नदी के किनारे स्थित होने के कारण और भी खूबसूरत हो जाता है।

पर्यटकों द्वारा इस की परछाई तक को यमुना नदी के पानी में देखा जा सकता है जो कि अपने आप में आश्चर्यजनक हैं।

परंतु वर्तमान समय में यमुना नदी के कारण ताजमहल को कई सारी परेशानियों का सामना उठाना पड़ रहा है, जिसके बारे में हम इस लेख के आगे के भाग में चर्चा करने वाले हैं।

 

ताजमहल बनाने वाले कारीगरों और मजदूरों के हाथ क्यों काट दिए गए थे 

अगर हम मध्यकालीन इतिहास की पुस्तकों को उठा कर देखे तो उसमें हमें यह बताया जाता है कि ताजमहल को बनाने वाले कारीगरों और मजदूरों के हाथ मुगल सम्राट शाहजहां द्वारा कटवा दिए गए थे और इसका मुख्य कारण यह था कि इस प्रकार की इमारत का निर्माण किसी अन्य जगह पर ना कर पाए।

इस बात में कितना सच है और कितना झूठ है इसके बारे में संपूर्ण जानकारी प्राप्त करना असंभव है परंतु बहुत सारी मान्यता प्राप्त किताबों और पुस्तकों से हमें यह पुख्ता जानकारी प्राप्त होती हैं।

कई सारे इतिहासकारों के इसके बारे में अपने अलग-अलग विचार हैं इनमें से कुछ इतिहासकार यह मानते हैं कि शाहजहां ने ऐसा ही किया था अर्थात कि मजदूरों और कारीगरों के हाथ कटवा दिए थे

जबकि कुछ इतिहासकारों का यह मानना है कि शाहजहां द्वारा उनके हाल तो नहीं कटवाएंगे परंतु उनसे यह वादा जरूर करवाया गया कि वह अब आजीवन कहीं पर भी काम नहीं करेंगे और इसके बदले में उन्हें जिंदगी भर वेतन भी दिया जाएगा।

इतिहासकार राजकिशोर के अनुसार ऐसा कहा जाता है कि शाहजहां ने ताजमहल का निर्माण करने वाले मजदूर और कारीगरों को आजीवन भर वेतन देने का पूरा पक्का वादा किया था,

और इस बात से संपूर्ण मजदूर और कारीगर भी सहमत हो गए थे क्योंकि उन्हें बिना किसी काम के जीवन भर वेतन जो मिलने वाला था।

 

ताजमहल (Taj mahal) को बनाने में कितना वक्त लगा था 

अभी तक हम यह तो जान चुके हैं कि ताजमहल का निर्माण किसके द्वारा कराया गया था और कब कराया गया था और किसकी याद में कराया गया था।

ताजमहल के निर्माण में कुल 22 साल का समय लगा था। इस नया ताजमहल को बनाने की शुरुआत सन 1631 में की गई थी और इसे बनाने का पूरा काम सन 1653 में पूरा हुआ था।

शाहजहां द्वारा लगभग अपने पूरे शासनकाल को ही ताजमहल के लिए समर्पित कर दिया गया था क्योंकि 1628 में शाहजहां मुगल सम्राट की राजगद्दी पर बैठा था और 1658 में उसकी मृत्यु हो गई थी।

अपने शासन की राजगद्दी प्राप्त करने के मात्र 4 वर्षों बाद ही 1631 में इसके द्वारा ताजमहल के निर्माण की शुरुआत करवा दी गई जो कि इसकी मृत्यु के 5 साल पहले 1653 में पूरा हुआ था।

 

ताजमहल को बनाने में कितने सारे मजदूरों ने भाग लिया था 

शाहजहां द अपनी बेगम मुमताज की याद में एक ऐसे महल का निर्माण करवाना चाहता था जो कि पूरी दुनिया में मोहब्बत के एक उदाहरण के रूप में देखा जाए, इसीलिए उसके द्वारा हर संभव कोशिश की गई।

इस ताजमहल को बनाने में इस बात को नहीं देखा गया कि इसमें कितने रुपए पैसे खर्च हो रहे हैं या इससे उनके राज्य की आर्थिक स्थिति पर क्या प्रभाव पड़ेगा।

शाहजहां बस यह चाहता था कि उसका और उसकी बेगम मुमताज का प्यार पूरी दुनिया के सामने अमर रहे।

इस ताजमहल को बनाने के लिए लगभग 21000 मजदूरों ने काम किया था और उस समय तक यह 21000 मजदूर एक बहुत बड़ी संख्या हुआ करती थी।

 

ताजमहल को बनाने में कितने रुपए का खर्च आया था 

आगरा में स्थित ताजमहल को बनाने के लिए लगभग 31 से 32 करोड़ का खर्च आया था।

उस समय तक यह राशि एक बहुत बड़ी संख्या के रूप में मानी जाती थी, इससे लगभग पूरे राज्य की अर्थव्यवस्था को चलाया जा सकता था परंतु शाहजहां द्वारा इतने रुपए का खर्च केवल अपने प्यार की निशानी ताजमहल पर करवाया गया।

अलग-अलग इतिहासकारों द्वारा ताजमहल पर खर्च किए गए रुपए पैसों की राशि को भी अलग-अलग बताया जाता है

और इनमें से कुछ इतिहासकारों का मानना था कि इस राशि की गणना 31 से 32 करोड़ कैसे की जा सकती है क्योंकि उस समय तक तो मुद्रा प्रणाली पूर्ण रूप से प्रचलित भी नहीं थी।

परंतु कुछ इतिहासकारों का मानना है कि उस समय इस ताजमहल को बनाने पर कितने रुपए खर्च किए गए उनको आज के संदर्भ में पूर्ण रूप से माप कर इस आंकड़े को प्राप्त किया गया है जो की पूर्णता सत्यापित हैं।

 

ताजमहल में कुल कितने कमरे हैं 

ताजमहल आज भी पर्यटकों के लिए आश्चर्यचकित कर देने वाली इमारत के रूप में जानी जाती हैं।

ऐसा माना जाता है कि ताजमहल में कुल 120 कमरे हैं परंतु इनमें से कुछ कमरे पर्यटको के लिए खुले नहीं है, उन्हें सरकार द्वारा बंद कर दिया गया है।

इनमें से कुछ कमरे तो ऐसे हैं जो कई 100 सालों से बंद पड़े हैं और इन को खुलवाने को लेकर भारत की न्यायपालिका में मुकदमे भी चल रहे हैं।

अगर वर्तमान के रिकॉर्ड की बात की जाए तो इन 120 कमरों में से लगभग 22 कमरे आज भी ताज महल के अंदर बंद पड़े हैं। इनके बंद होने के कारण अलग-अलग हो सकते हैं।

 

ताजमहल में क्या खास बात है 

ताजमहल की सबसे खास बात जो है, वह यह है कि यह पूरे के पूरे संसार में आज भी एक अटूट प्यार की निशानी के रूप में माना जाता है।

इसमें शाहजहां की बेगम मुमताज की कब्र बीचो-बीच बनी हुई है और साथ ही उसके पास में शाहजहां की कब्र भी बनी हुई है जो यह संकेत देती है कि मरने के बाद भी वे साथ रहे और उनका प्यार अटूट और अजर अमर रहा।

शाहजहां चाहता था कि मरने के बाद उसकी कब्र को भी उसकी बेगम मुमताज के बगल में ही बनवाया जाए इसीलिए ताजमहल में उसकी बेगम मुमताज के बगल में उसकी कब्र को बनवाया गया था।

 

यमुना नदी से ताजमहल को क्या नुकसान हो रहा है

जैसा कि आप सभी जानते हैं आगरा का ताजमहल यमुना नदी के किनारे स्थित है परंतु यमुना नदी आज वर्तमान में इतनी ज्यादा प्रदूषित हो गई है जिस कारण से इसका खामियाजा आगरा के ताजमहल को भुगतना पड़ रहा है।

यमुना नदी में कई सारे बड़े बड़े नालों और फैक्ट्रियों का गंदा पानी आता है जिससे दिया नदी बहुत ज्यादा प्रदूषित होती जा रही हैं और साथ ही इसमें से बहुत ही बुरी बदबू आती रहती हैं जो इस ताजमहल की खूबसूरती को भी थोड़ा कम कर देती हैं।

साथी यहां होने वाली अम्लीय वर्षा के कारण इस ताजमहल का सफेद रंग लगातार गायब होता जा रहा है और इस पर पीले रंग की परत जमती जा रही हैं। अगर आपने कभी ताजमहल को बहुत ज्यादा पास में जाकर देखा है तो आप को यह बात मालूम होगी।

इस हेतु राज्य सरकार और केंद्र सरकार द्वारा अपने अपने स्तर पर बहुत ज्यादा प्रयास किए जा रहे हैं परंतु अभी तक इसका कोई भी सकारात्मक प्रभाव नहीं देखने को मिला है जो कि बेहद ही दुखद है।

 

ताजमहल का निर्माण कौन से पत्थर से किया गया है

ताजमहल के निर्माण में जिस पत्थर का सर्वाधिक इस्तमाल किया गया था वह था, संगमरमर अर्थात की सफेद मार्बल। इसी संगमरमर पत्थर के कारण हमें ताजमहल इतना ज्यादा सफेद दिखाई देता है।

इस संगमरमर के पत्थर के अलावा इसके निर्माण में हाथी दांत का भी भरपूर इस्तेमाल किया गया था और खास तौर पर शाहजहां की बेगम मुमताज के मकबरे को बनाने में हाथी दांत और संगमरमर का ज्यादा इस्तेमाल किया गया था।

 

FAQ : Taj Mahal kisne banaya tha

सवाल : ताजमहल (tajmahal) का निर्माण किसने किया था ?

ताजमहल का निर्माण मुगल सम्राट शाहजहां द्वारा करवाया गया था

सवाल : शाहजहां द्वारा ताज महल का निर्माण कब और किसकी याद में कराया गया था।

शासनकाल के आरंभिक वर्षों में 1632 में शुरू किया गया था जो कि 1653 में पूर्ण हुआ। इस ताजमहल का निर्माण शाहजहां द्वारा अपनी बेगम मुमताज की याद में कराया गया था।

सवाल : ताजमहल के मुख्य वास्तुकार कौन थे।

ताजमहल निर्माण के मुख्य वास्तुकार उस्ताद अहमद लाहौरी थे। ऐसा माना जाता है कि इस ताजमहल के निर्माण के बाद शाहजहां द्वारा उन्हें सारी उम्र तक बिना किसी काम के वेतन दिया गया था।

सवाल : ताजमहल कहां और किस नदी के किनारे स्थित है।

ताजमहल वर्तमान उत्तर प्रदेश के आगरा जिले में स्थित है वह इसके किनारे यमुना नदी बहती हैं।

सवाल : ताजमहल को बनाने में कुल कितने रुपए का खर्च आया था।

इतिहासकारों का मानना है कि ताजमहल को बनाने में कुल 32 करोड का खर्च आया था।

 

Conclusion

आज के इस लेख में हमने Taj mahal kisne banaya tha के बारे में वह सभी जानकारियां एकत्रित की है और उनको जाना है जो आपके लिए जानना बेहद जरूरी है।

जैसे कि ताजमहल का निर्माण किसने किया थाऔर कब, ताजमहल के रहस्य, लागत, मजदूर सिमित अन्य सभी महत्वपूर्ण सवालों का जवाब इस लेख में विस्तार में प्रदान किया है

अगर आपको हमारा यह लेख पसंद आए तो अपने बहुमूल्य कमैंट्स को हमारे लेख के कमेंट बॉक्स में जरूर टाइप करें ताकि आगे आने वाले समय में  हम इसी प्रकार के ज्ञानवर्धक लेख हम आपके लिए लाते रहे। धन्यवाद

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