उपमा अलंकार (Upma Alankar ke Udaharan) की संपूर्ण जानकारी

upma alankar ke udaharan : अलंकार शब्द की रचना दो शब्दों के मेल से हुई है- ‘ अलं ‘ तथा ‘ कार ‘ । ‘ अल ‘ का अर्थ है- ‘ शोभा या सौंदर्य। कार ‘ शब्द ‘ कर ‘ से बना है , जिसका अर्थ है – ‘ करनेवाला’

इस तरह अलंकार शब्द का अर्थ हुआ- ‘ शोभा करनेवाले ‘ । अर्थात वे उपादान जो हमारे वाक्य में  ‘शोभा’ उत्पन्न कर देते हैं ।

भाषा में दो चीज़ें मुख्य होती हैं – हमारे वाक्य का क्या अर्थ है तथा उन वाक्यों को कहने की अभिवक्ति।

अभिवक्ति को सही प्रकार से प्रदर्शित करने केलिए अलंकारों का इस्तेमाल किया जाता है

अलंकार हमारे शब्दों को सुंदर भी बनाते है तथा सामने वाले के वाक्य का अर्थ और अभियक्ति दोनों प्रगट करते है, अलंकार को काव्य की आत्मा कहते है अलंकार शब्दों को मतलब देने में तथा उनको समझने में भी सहायता करते है

आज के लेख में हम उपमा अलंकार किसे कहते है, उपमा अलंकार की परिभाषा सहित Upma Alankar ke Udaharan के बारे में विस्तार में जानने की कोशिश करेंगे

इस लेख में हम ने अलंकार क्या होता है उनके मुख्य रूप, प्रकार के बारे में भी उदहारण सहित जानकारी प्रदान करने की कोशिश की है यदि आप भी इस व्याकरण के इस भाग को विस्तार में जानना चाहते है तो इस लेख को शुरवात से अंत तक जरूर पढ़े

 

विषय

उपमा अलंकार और उदाहरण | Upma Alankar ke Udaharan 

 

Upma Alankar ke Udaharan 
 upma alankar with examples in Hindi 

 

अलंकार मुख्य रूप से दो प्रकार के होते है

  1. शब्दालंकार
  2. अर्थालंकार

शब्दालंकार किसे कहते हैं

शब्दालंकार काव्यों में कुछ विशेष शब्दों में चमत्कार उत्पन्न करते है अर्थात यह शब्दों के उद्देश्य तथा वह जिस विशेषता पर केन्द्रित है उसे प्रमुखता में दिखाने में सहायता करता है

उदहारण से समझे

यदि किसी शब्द विशेष के स्थान पर किसी समानार्थी शब्द का प्रयोग किया जाने से उस शब्द की शोभा अर्थात चमत्कार ख़त्म हो जाता है

वर के इलावा तुम कोई भी वर मांग लो

इसमें पहले वर का अर्थ पति होता है तथा दुसरे वर का मतलब वरदान से है

यदि पहले वर की जगह उसका समानार्थी शब्द पति का इस्तेमाल किया जाए तब कवी अपने वाक्य में जो चमत्कार पैदा करना चाहता था वह नही कर पाएगा


शब्दालंकार के भेद

अनुप्रास अलंकार किसे कहते हैं

इसमें चमत्कार शब्दों की रचना करने वाले शब्दों से उत्पन्न होता है अर्थात किसी कविता में बोले जाने पे एक तरह का ताल पैदा करने वाले शब्दों का बार-बार उपयोग करने से तथा एक ही शब्द का बार-बार प्रयोग करने से चमत्कार पैदा होता है तथा ऐसा चमत्कार पैदा करने वाले शब्दों को अनुप्रास अलंकार कहते है

इनका इस्तेमाल शब्दों की आवृत्ति शब्दों के अंत में, आरम्भ में, मध्य के शब्दों में किया जा सकता है, अर्थात इसका उपयोग शब्दों में कही भी किया जा सकता है

अनुप्रास अलंकार के उदाहरण

  • मोर मुकट कर कुंडल

इस काव्य में मोर, मुकुट और मकर के पहले अक्षर ‘म’ शब्द से शुरू हो रहे है जिसके कारण इन्हें पढने वाले पाठक को पढने में अच्छा लगता है तथा एक प्रकार का चमत्कार पैदा हो जाता है


आरंभिक शब्दों में आवृति के कुछ अन्य उदाहरण

  • ल कानन कुंडल मोर परा(इसमें  शब्द को वर्णों के आरम्भ में इस्तेमाल किया गया है )

  • घुपति-राघव राजा रा(इसमें  शब्द को वर्णों के आरम्भ में इस्तेमाल किया गया है )

  • सत  सुधरही सत संगति(इसमें  शब्द का प्रयोग वर्णों के आरम्भ में किया गया है )

वर्णों के बीच में शब्द की आवृति

  • छोटी है गोटी या चोथी अहीर की(इसमें  शब्द का प्रयोग वर्णों के मध्य में किया गया है )

वर्णों के अंत में शब्द की आवृति

  • जाके सि मो मुकुट (इसमें  शब्द का प्रयोग वर्णों के अंत में किया गया है)

  • न कर्म वच ध्या जो लावे(इसमें  शब्द का प्रयोग वर्णों के अंत में किया गया है)

यमक अलंकार किसे कहते हैं

इसमें वर्णों के सही से उपयोग करने पर चमत्कार प्रगट होता है, एक ही वर्ण को काव्य में अलग-अलग जगह अलग-अलग अर्थ से इस्तेमाल किया जाता है इसमें शब्दों से चमत्कार प्रगट होता है

एक ही वर्ण को उसके समानार्थक शब्द के अर्थ से उसी एक वर्ण को दो या दो से अधिक बार इस्तेमाल किया जाता है


यमक अलंकार के उदाहरण

  • हर बरस, बरस दिन आवै

इसमें पहले बरस का अर्थ साल से है तथा दुसरे बरस का अर्थ मृत्यु के दिन से होता है

दोनों ही शब्द बरस के समानार्थक है तथा इनका इस्तेमाल काव्य को आकर्षित बनाने के लिए किया गया है इसमें एक ही शब्द को दो बार दो अलग अर्थ से प्रयोग किया गया है


यमक अर्थ के अन्य उदाहरण

  • कर की मनका छोड़ के मन का मनका फेर 

इसमें मनका शब्द का इस्तेमाल दो बार किया गया है, तथा दोनों मनका का अर्थ अलग है  पहले मनका का अर्थ माला से है तथा दुसरे मनका का अर्थ मन से है इसमें कवि के कहने का अर्थ है की हाथ की माला छोड़ कर मन की माला जपिए


  • कनक-कनक ते सौगुनी माद की कता अधिकाय

इसमें कनक शब्द का प्रयोग दो बार किया गया है तथा दोनों के अर्थ अलग-अलग है

पहले कनक का अर्थ धतूरा है तथा दुसरे कनक का अर्थ सोना से है, इसमें कवि कहना चाहता है कि पहले धतूरे(नशे) को तो व्यक्ति खाकर पागल होता है परन्तु दुसरे धतूरे(सोना) को तो व्यक्ति पाकर ही पागल हो जाता है


  • तीन बेर  वे तीन बेर खाती है 

इसमें बेर शब्द का प्रयोग दो बार किया गया है तथा दोनों के अर्थ अलग-अलग है

पहले बेर का अर्थ बेर फल से है तथा दुसरे बेर का अर्थ बार से है, इसमें कवि कहना चाहता है कि वह तीन बेर(फल) तीन बार खाती है


  • तू मोहन के उरबसी है, उरबसी समान 

इसमें उरबसी शब्द का प्रयोग दो बार किया गया है तथा दोनों के अर्थ अलग-अलग है

पहले उरवसी का अर्थ ह्रदय से है तथा दुसरे उरवसी का अर्थ देव सुंदरी से है, इसमें कवि कहना चाहता है की तुम कृष्ण के ह्रदय में उरवसी के समान बसी हुई हो


श्लेष अलंकार किसे कहते हैं

श्लेष शब्द का अर्थ चिपकना है, इस अलंकार में काव्यों के किसी शब्द से एक से अधिक अर्थ चिपके रहते है  इसीलिए  इसे श्लेष अलंकार कहते है

एक ही काव्य या वाक्य में जब एक ही शब्द से लेखक एक से अधिक अर्थ को प्रगट करता है आम तौर पे  इनके अर्थ वाक्य पर निर्भर करते है


श्लेष अलंकार के उदाहरण

  • सुमन को जाए मधुमन संदेश

इस काव्य में सुमन और मधुमन दोनों के ही दो अर्थ है तथा दोनों हे श्लेष अलंकार है

सुमन शब्द के दो अर्थ है पुष्प और सुन्दर मन है 

मधुमन शब्द के दो अर्थ मधुर और वसंत ऋतु है 


  • सुबरन को ढूँढता फिर रहा , कवि व्यभिचारी चोर

इसमें सुबरन शब्द का अर्थ कवि के सन्दर्भ में सुन्दर से है, सुबरन शब्द का अर्थ व्यभिचारी के सन्दर्भ में रंगवाली सुंदरियाँ से और सुबरन शब्द का अर्थ चोर के सन्दर्भ में सोना से है


अर्थालंकार

इस अलंकार में अर्थ द्वारा चमत्कार पैदा किया जाता है अर्थात सही अर्थ को सही समय तथा सही समय पर प्रयोग करके वाक्य अथवा काव्य में चमत्कार उत्पन्न किया जाता है

किसी व्यक्ति वस्तु भावना का वर्णन करते समय उनको किसी बाहरी वस्तु व्यक्ति और भावना से सम्बन्ध दिखाता है

जिस शब्द को ववह सीधा अपने काव्य में उपयोग कर रहा है उसे प्रस्तुत कहते है तथा जिस बाहरी वस्तु व्यक्ति और भावना के सामान बताता है उसे अप्रस्तुत कहते है

सारा काव्य प्रस्तुत तथा अप्रस्तुत के बीच ही चलता है कभी कवि इनकी तुलना करता है कभी इनकी समानता दिखता है कभी कभी इनमे से किसी पे आरोप लगाता  है

और कभी इनके बीच संभावना प्रस्तुत करता है इस प्रकार लगभग सारा काव्य प्रस्तुतु तथा अप्रस्तुत के बीच ही चलता है

इन्ही सब क्रियाओं के कारण विभिन्न प्रकार के अर्थ सामने आते है तथा यह अलंकार अर्थालंकार बन जाता है

अलंकार में प्रस्तुत को उपमेय तथा अप्रस्तुत को उपमान भी कहा जाता है

अर्थालंकार के भेद 

अर्थालंकार के पांच प्रकार है

  1. उपमा अलंकार
  2. रूपक अलंकार
  3. उत्प्रेक्षा अलंकार
  4. अतिशयोक्ति अलंकार
  5. मानवीकरण अलंकार

 

उपमा अलंकार (Upama alankar) किसे कहते हैं

जब दो व्यक्तियों या चीज़ों के बीच में समानता दिखाई जाती है वहाँ पर उपमा अलंकार का प्रयोग होता है

अर्थात दो व्यक्ति  या चीज़ों के बीच गुणों या अवगुणों, विशेषताओं को लेकर समानता प्रगट करनी हो तब वहाँ  पे Upama alankar का प्रयोग होता है

वाक्य में प्रस्तुत, अप्रस्तुतसाधारण धर्म और वाचक शब्द का प्रयोग होता है, जिसकी विशेषता बताई गयी हो उसे प्रस्तुत कहते है तथा जिसके समान बतायी गयी हो उसे अप्रस्तुत कहते है

वह गुण औगुन विशेषता या धर्म जिसके आधार पर समानता बताई गयी हो उसे साधारण धर्म कहते है, समानता को बताने वाले शब्द को वाचक शब्द कहते है


उपमा अलंकार के उदाहरण – Upma Alankar ke Udaharan

सीता की आँखें मृग के समान चंचल है 

इस वाक्य में सीता की आँखों की चंचलता को मृग के सामान दर्शाया गया है

अर्थात सीता के आँखों की चंचलता को मृग के समान एक स्थान पे ना रहने वाला बताया गया है

इस वाक्य में सीता की आँखे प्रस्तुत है तथा मृग अप्रस्तु है

इस वाक्य में चंचल शब्द विशेषता के लिए प्रयोग किया गया है अर्थात ये साधारण धर्म है

इस वाक्य में समान शब्द को समानता बतानें  के लिए प्रयोग किया गया है अर्थात ये वाचक शब्द है

तथा जिस भी वाक्य में प्रस्तुत, अप्रस्तुत, साधारण धर्म और वाचक शब्द इन चारो का प्रयोग हो उसे पूर्णोपमा अलंकार कहते है तथा जिस भी वाक्य में इन चरों में से किसी एक या एक से ज्यादा की कमी हो उसे लुप्तोपमा अलंकार कहते है


उपमा अलंकार की उदाहरण

पीपर पात से मन डोले

  • इस वाक्य में

प्रस्तुत (उपमेय)      = मन शब्द

अप्रस्तुत (उपमान)  = पीपर पात

साधारण धर्म          = डोले

वाचक शब्द           = से


यह देखिए विवेक से शिशु कैसे सो रहा है 

  • इस वाक्य में

प्रस्तुत (उपमेय)      = शिशु

अप्रस्तुत (उपमान)  = विवेक

साधारण धर्म          = कैसे सो

वाचक शब्द           = से


हरिपद कोमल कमल से 

  • इस वाक्य में

प्रस्तुत (उपमेय)      = हरिपद

अप्रस्तुत (उपमान)  = कमल

साधारण धर्म          = कोमल

वाचक शब्द           = से


मखमल के झूल पड़े हाथी सा टीला

  • इस वाक्य में

प्रस्तुत (उपमेय)      = टीला

अप्रस्तुत (उपमान)  = मखमल के झूल पड़े हाथी

साधारण धर्म          = लुप्त

वाचक शब्द           = सा


वह नवनलिनी से नयनवाल कहाँ है 

  • इस वाक्य में

प्रस्तुत (उपमेय)      = नयनवाला

अप्रस्तुत (उपमान)  = नयनलिनी

साधारण धर्म          = लुप्त

वाचक शब्द           = से


हाय पुष्प सा कोमल बच्चा हुआ राख

  • इस वाक्य में

प्रस्तुत (उपमेय)      = बच्चा

अप्रस्तुत (उपमान)  = पुष्प

साधारण धर्म          = राख

वाचक शब्द           = कोमल


मछ्मली पाटियों सी लटकी

  • इस वाक्य में

प्रस्तुत (उपमेय)      = मछ्मली
अप्रस्तुत (उपमान)  = पाटियों
साधारण धर्म          = लटकी
वाचक शब्द           = सी


मरकत डिब्बो सा खुला ग्राम 

प्रस्तुत (उपमेय)      = ग्राम
अप्रस्तुत (उपमान)  = मरकत डिब्बो
साधारण धर्म          = खुला
वाचक शब्द           = सा


रूपक अलंकार किसे कहते हैं

इस अलंकार का उपयोग वहाँ होता है जहाँ प्रस्तुत तथा अप्रस्तुत में बहुत ज्यादा समानता होने के कारण दोनों को एक समझा जाता है अधवा दोनों में भेद को प्रगट किया जाता है

और दोनों को सामान तो दिखाया जाता है पर इस असमानता के साथ की वो अलग है अर्थात प्रस्तुत पर अप्रस्तुत का आरोप करते है इसमें प्रस्तुत पर अप्रस्तुत का आरोपण करवा दिया जाता है अप्रस्तुत को प्रस्तुत का रूप कह दिया जाता है


रूपक अलंकार के उदाहरण

कमल नयन

इसमें प्रस्तुत नयन है और अप्रस्तुत कमल है

कमल-नयन का अर्थ है कमल रुपी नेत्र


अन्य उदहारण

चरण कमल 

इसमें ‘चरण-कमल’ का अर्थ ‘कमल रूपी चरण’ से है

प्रस्तुत (उपमेय)      = चरण
अप्रस्तुत (उपमान)  = कमल


आए महंत-वसंत

इसमें ‘महंत-वसंत’ का अर्थ महंत रुपी वसंत है

प्रस्तुत (उपमेय)      = महंत
अप्रस्तुत (उपमान)  = वसंत


मैया मई तो चन्द्र खिलौना लैहों

इसमें मैया मै तो चन्द्र-खिलौना लैहों का अर्थ मैया मै चन्द्रमा रुपी खिलौना लूँगा है

प्रस्तुत (उपमेय)      = खिलौना
अप्रस्तुत (उपमान)  = चन्द्रमा


क्या उनका उपकार  भार तुम पर क़र्ज़ नहीं है 

इसमें ‘क्या उनका उपकार-भार तुम पर क़र्ज़ नहीं है’ का अर्थ ‘क्या उनका उपकार रूपी भार तुम पर लवलेश नहीं है’ है

प्रस्तुत (उपमेय)      = भार
अप्रस्तुत (उपमान)  = उपकार


अभिमन्यु-धन के निधन से हुआ जो सूल है 

इसमें ‘अभिमन्यु-धन के निधन के कारण हुआ जो सूल है’ का अर्थ ‘अभिमयु रूपी धन के निधन के कारण जो सूल है’ है

प्रस्तुत (उपमेय)      =अभिमन्यु
अप्रस्तुत (उपमान)  =धन


विष-बाण बूँद से छोंटेंगी

इसमें ‘ विष-बाण बूँद से छोंटेंगी’ का अर्थ विष रूपी बाण से बूँद से छोंटेंगी’ से है

प्रस्तुत (उपमेय)      =बाण
अप्रस्तुत (उपमान)  =विष


हां पायो जी मैंने राम रत्न धन पायो 

इस काव्य में राम रत्न धन पायो का अर्थ राम रूपी धन से है

प्रस्तुत (उपमेय)      =राम रत्न
अप्रस्तुत (उपमान)  =धन


उत्प्रेक्षा अलंकार किसे कहते हैं

इस अलंकार का उपयोग प्रस्तुत और अप्रस्तुत के सामान होने के कारण एक का दुसरे की होने की संभावना के लिए किया जाता है

इसमें गुण धर्म या विशेषता के कारण दोनों में समानता को संभावना को प्रगट करने के लिए किया जाता है अर्थात प्रस्तुत को अप्रस्तुत के समान मान लिया जाता है अथवा संभावित कर दिया जाता है

उत्प्रेक्षा अलंकार  में संभावना प्रगट करने के लिए मानो मनहु मनहूँ जानो जनहु ज्यों जनु आदि वाचक शब्दों का प्रयोग किया जाता है जहा पे भी ये शब्द काव्य में आए वहां ये समझा जा सकता है की ये उत्प्रेक्षा अलंकार है


उत्प्रेक्षा अलंकार के उदाहरण

बार-बार उस भीषण रव से कांपती धरती देख विशेष, मानो हवा के जोर से सोता हुआ सागर जगा

यहाँ पर हवा को इतनी ताकतवर दिखाया गया है की उससे सोता हुआ सागर जग जाए

मानो शब्द दोनों में संभावना प्रगट करने के लिए प्रयोग किया गया है


अन्य उदाहरण

वह ऐसे दौड़ता है मानो चीता भाग रहा हो


अतिशयोक्ति अलंकार किसे कहते हैं

अतिशयोक्ति का अर्थ बहुत बढ़ा चढ़ा के प्रगटाव से है

इस अलंकार में प्रस्तुत को बहुत बढ़ा चढ़ा के प्रगट किया जाता है


अतिश्योक्ति अलंकार के उदाहरण

हनुमान ने पूछ में आग लगा के पूरी लंका जला दी पर उनकी पूछ को कुछ नही हुआ

इस काव्य में इस बात को बहुत बढ़ा चढ़ा के प्रगट किया गया है की हनुमान जी की पूछ में आग तो नही लग पाई पर पूरी लंका जल गई


अन्य उदाहरण

देख लो ये नगर तारों से मिलने गगन जा रहा 

इसमें साकेत नगरी की ऊँचाई को शुशोभित करने के लिए उसे आसाम से जुड़ा हुआ बढ़ा चढ़ा कर बताया जा रहा है अर्थात साकेत नगर की बड़ाई बढ़ा चढ़ा  के की गयी है


देख के सुदामा की दशा, करूणानिधि दो दिए, पानी हाथ छूए नहीं नैनं के जल से पाँव धोए

सुदामा की दशा देख कर श्री कृष्णा करुना से रो दिए तथा उन्होंने उनके पैर अपने आंसुओं से धुल दिए


आगे सागर बड़ा अपार बिचारा घोडा कैसे करे पार

इसमें नदी को सागर के सामान दिखाया गया है तथा यह दर्शाया गया है की अब इसे हमारा घोडा कैसे पार करे


मानवीकरण अलंकार किसे कहते हैं

मानवी शब्द का अर्थ मनुष्य अर्थात मानव से है जब कवि प्रकृति के वर्णन मिएँ मनुष्य शब्द और अवस्था का प्रयोग करता है वहा पर मानवीकरण अलंकार का प्रयोग किया जाता है

मनुष्य अपनी कल्पनाओं में वस्तु, प्रकृति आदि को मानवी भावनाओ से जोड़ता है तथा अपने काव्य में चमत्कार प्रकट करता है वहां पर मानवीकरण अलंकार का प्रयोग हुआ होता है

कवियों ने प्रकृति को नारी की माना है तथा उसके लिए नारे की भावना प्रगट की है तथा इसी प्रकार हमने पेड़ को पुरुष, गगन को पुरुष आदि से संबोधित करके अपने पाठ और काव्य में चमत्कार उत्पन्न करते है


मानवीकरण अलंकार के उदाहरण

उषा सुनहरे तीर बरसाती लक्ष्मी उदित होके

इसमें उषा के आगमन को तीर की वर्षा करने वाली लक्ष्मी के समान संबोधित किया है


अलंकार के सभी प्रकारों की परिभाषा

1  उपमा अलंकार    

अर्थालंकार

 

जब दो व्यक्तियों या चीज़ों के बीच में समानता दिखाई जाती है वह पर उपमा अलंकार का प्रयोग होता है 
  श्लेष अलंकार  

शब्दालंकार  

 

इसमें अलंकार में काव्यों के किसी शब्द से एक से अधिक अर्थ चिपके रहते है   

3   

रूपक अलंकार 

 

अर्थालंकार  

 

इसमें प्रस्तुत पर अप्रस्तुत का आरोप करते है इसमें प्रस्तुत पर अप्रस्तुत का आरोपण करवा दिया जाता है अप्रस्तुत को प्रस्तुत का रूप कह दिया जाता है 

4   

उत्प्रेक्षा अलंकार 

 

अर्थालंकार  

 

इसमें गुण धर्म या विशेषता के कारण दोनों में समानता को संभावना को प्रगट करने के लिए किया जाता है 

5  अनुप्रास अलंकार  शब्दालंकार    

इसमें चमत्कार शब्दों की रचना करने वाले वर्णों से उत्पन्न होता है अर्थात किसी कविता में बोले जाने पे एक तरह का ताल पैदा करने वाले शब्दों का एक से अधिक बार तथा एक ही शब्द का अलग अलग अर्थ से प्रयोग करने से चमत्कार पैदा होता है 

6  यमक अलंकार   

शब्दालंकार  

 

इसमें वर्णों के सही से उपयोग करने पर चमत्कार प्रगट होता है, एक ही वर्ण को काव्य में अलग-अलग जगह अलग-अलग अर्थ से इस्तेमाल किया जाता है इसमें वर्णों से चमत्कार प्रगट होता है 

7   

अतिशयोक्ति अलंकार  

 

अर्थालंकार  

 

इस अलंकार में प्रस्तुत को बहुत बढ़ा चढ़ा के प्रगट किया जाता है 

8   

मानवीकरण अलंकार  

 

अर्थालंकार  

 

मनुष्य अपनी कल्पनाओं में वस्तु, प्रकृति आदि को मानवी भावनाओ से जोड़ता है तथा अपने काव्य में चमत्कार प्रकट करता है वहां पर मानवीकरण अलंकार का प्रयोग हुआ होता है 

 

FAQs – उपमा अलंकार (Upma Alankar) की उदाहरण

सवाल : अलंकार क्या होता है?

अलंकार शब्द की रचना दो शब्दों के मेल से हुई है- ‘ अलं ‘ तथा ‘ कार ‘ । ‘ अल ‘ का अर्थ है- ‘ शोभा या सौंदर्य। कार ‘ शब्द ‘ कर ‘ से बनाहै , जिसका अर्थ है – ‘ करनेवाला’ । इस तरह अलंकार शब्द का अर्थ हुआ- ‘ शोभा करनेवाले ‘ । अर्थात वे उपादान जो हमारे वाक्य में  ‘शोभा’ उत्पन्न कर देते हैं ।

सवाल : अलंकार के कितने भेद होते है ?

अलंकार के मुख्य रूप से दो भेद होते है शब्दालंकार और अर्थालंकार, शब्दालंकार और अर्थालंकार के भी प्रकार होते है

शब्दालंकार के तीन भेद है

  1. अनुप्रास अलंकार
  2. यमक अलंकार
  3. श्लेष अलंकार

अर्थालंकार के पांच भेद है

  1. उपमा अलंकार
  2. रूपक अलंकार
  3. उत्प्रेक्षा अलंकार
  4. अतिशयोक्ति अलंकार
  5. मानवीकरण अलंकार

सवाल : उपमा अलंकार के उदाहरण ?

  1. सुशीला की आँखें मृग के समान चंचल है 
  2. पीपर पात से मन डोले
  3. वह नवनलिनी से नयनवाल कहाँ है 

सवाल : शब्दालंकार क्या है?

शब्दालंकार काव्यों में कुछ विशेष शब्दों में चमत्कार उत्पन्न करते है अर्थात यह शब्दों के उद्देश्य तथा वह जिस विशेषता पर केन्द्रित है उसे प्रमुखता में दिखाने में सहायता करता है

सवाल : अर्थालंकार क्या है ?

इस अलंकार में अर्थ द्वारा चमत्कार पैदा किया जाता है अर्थात सही अर्थ को सही समय तथा सही समय पर प्रयोग करके वाक्य अथवा काव्य में चमत्कार उत्पन्न किया जाता है

किसी व्यक्ति वस्तु भावना का वर्णन करते समय उनको किसी बाहरी वस्तु व्यक्ति और भावना से सम्बन्ध दिखाता है जिस शब्द को वह सीधा अपने काव्य में उपयोग कर रहा है उसे प्रस्तुत कहते है तथा जिस बाहरी वस्तु व्यक्ति और भावना के सामान बताता है उसे अप्रस्तुत कहते है

सवाल : मानवीकरण अलंकार क्या है ?

मानवी शब्द का अर्थ मनुष्य अर्थात मानव से है जब कवि प्रकृति के वर्णन मिएँ मनुष्य शब्द और अवस्था का प्रयोग करता है वहा पर मानवीकरण अलंकार का प्रयोग किया जाता है

मनुष्य अपनी कल्पनाओं में वस्तु, प्रकृति आदि को मानवी भावनाओ से जोड़ता है तथा अपने काव्य में चमत्कार प्रकट करता है वहां पर मानवीकरण अलंकार का प्रयोग हुआ होता है

कवियों ने प्रकृति को नारी की माना है तथा उसके लिए नारे की भावना प्रगट की है तथा इसी प्रकार हमने पेड़ को पुरुष, गगन को पुरुष आदि से संबोधित करके अपने पाठ और काव्य में चमत्कार उत्पन्न करते है


conclusion 

आज के इस लेख में हमने उपमा अलंकार, उदाहरण, परिभाषा के बारे में वह सभी जानकारियां एकत्रित की जिन्हे जानना आपके लिए जानना बेहद जरूरी है।

इसके अलवा यदि आप को व्याकरण संबंधित अधिक जानकारी प्राप्त करनी है तो आप Nolejtak के व्याकरण श्रेणी में पब्लिश किये लेख को हिंदी भाषा में विस्तार में पढ़ सकते है

आपको हमारा Upma Alankar ke Udaharan लेख कैसे लगा यह निचे कमेंट में जरूर बताये इसके अलवा यदि लेख संबंधित कोई भी सवाल या सुझाव होंगे तो, कमेंट बॉक्स में जरूर टाइप करें ताकि आगे आने वाले समय में  हम इसी प्रकार के ज्ञानवर्धक लेख हम आपके लिए लाते रहे। धन्यवाद

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