Nabard Ki Sthapna – नाबार्ड की स्थापना कब हुई

Nabard Ki Sthapna : आज देखा जाए तो भारत में कई सारे बैंक संचालित किए जा रहे हैं जिनमें से कुछ सरकारी तो कुछ प्राइवेट बैंक है साथ ही साथ कुछ सहकारी बैंक भी भारत में संचालित किए जाते हैं

प्रत्येक बैंक की स्थापना करने का कुछ ना कुछ उद्देश्य जरूर होता है और उसकी स्थापना करते ही वह किसी एक वर्ग को टारगेट करते हैं जैसे कि स्टेट बैंक ऑफ इंडिया की स्थापना इसलिए की गई थी क्योंकि सरकार यह चाहती थी कि भारत के प्रत्येक व्यक्ति का एक बैंक अकाउंट होना चाहिए

अगर भारत के प्रत्येक नागरिक का एक बैंक अकाउंट सरकार खुलवाना चाहती है तो उसके लिए एक बहुत ही बड़े इन्फ्रास्ट्रक्चर की जरूरत सरकार को पड़ती इसीलिए सरकार ने स्टेट बैंक को चुना

वहीं दूसरी ओर भारत में एचडीएफसी बैंक भी संचालित होता है जो कि उद्योगपतियों और NRI के लिए संचालित किया जाता है

भारत की स्वतंत्रता के पश्चात सरकार भारत के किसान वर्ग को आगे लाना चाहती थी और उनकी हिस्सेदारी भी अर्थव्यवस्था में ज्यादा से ज्यादा बड़े यह प्रयास भी सरकार बहुत जोरों शोरों से कर रही थी

सरकार यह जानती थी कि ग्रामीण विकास और किसानों का कल्याण करने के लिए उन्हें वित्तीय संसाधन उपलब्ध कराना भी जरूरी है और इसी आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए सरकार ने नाबार्ड की स्थापना की थी

तो आज के इस लेख में हम इसी नाबार्ड की स्थापना के बारे में पढ़ने वाले हैं और साथ ही हम देखेंगे कि नाबार्ड की स्थापना करने के क्या क्या उद्देश्य थे और वर्तमान में नाबार्ड किस प्रकार से किसानों की सहायता कर रहा है

इसके साथ ही आज के हमारे इस लेख का मुख्य विषय रहेगा Nabard Ki Sthapna और नाबार्ड किस प्रकार से अपने कार्यों को संचालित करता है इत्यादि

 

Nabard Ki Sthapna kab hui
नाबार्ड विकिपीडिया

 

Nabard Ki Sthapna – नाबार्ड की स्थापना कब हुई

 

नाबार्ड जिसकी फुल फॉर्म है नेशनल बैंक फॉर एग्रीकल्चर एंड रूरल डेवलपमेंट की स्थापना   12 जुलाई 1982  को हमारे भारत में की गई थी

हालांकि इसकी स्थापना सरकार द्वारा पहले ही कर दी जाती परंतु उपयुक्त संसाधन और आपातकालीन स्थितियों के कारण यह पहले नहीं किया जा सका

इसकी स्थापना बी. शिवरामन समिति की सिफारिश पर की गई थी और जब इसकी स्थापना की गई तो इसकी प्रारंभिक पूंजी मात्र 100 करोड रुपए थी

अब नाबार्ड को इन्हीं 100 करोड़ रुपए की बदौलत संपूर्ण भारत के किसानों के लिए एक फाइनेंसियल प्लेटफार्म खड़ा करना था जिस पर की हमारे भारत के किसान अपनी प्रगति के मार्ग को प्रशस्त कर पाए

 

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जबकि 2022 में आज नाबार्ड की कुल पूंजी लगभग 7 लाख करोड रुपए तक पहुंच चुकी है जो कि किसी रूरल बैंक के लिए एक बहुत बड़ी उपलब्धि के समान है

इससे पहले वर्ष 2021 में नाबार्ड की कुल पूंजी 6.57 लाख करोड रुपए थी जो कि 2022 में फिर से बढ़ गई

भारत के इस बैंक नाबार्ड पर भारत सरकार का पूर्ण स्वामित्व विद्यमान है और इसे भारत के सबसे बड़े बैंक स्टेट बैंक ऑफ इंडिया द्वारा कंट्रोल किया जाता है

इसे स्थापित करने का सरकार का केवल एक ही उद्देश्य था कि ग्रामीण क्षेत्रों की अर्थव्यवस्था को आगे बढ़ाया जा सके और उन्हीं ग्रामीण क्षेत्रों में कृषि और साथ ही लघु उद्योगों का विकास भारतीय अर्थव्यवस्था के साथ साथ किया जा सके क्योंकि भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए कच्चा माल इन्हीं ग्रामीण उद्योगों से प्राप्त होता था और होता रहेगा

इस नाबार्ड बैंक को बनाने के लिए सबसे पहले 1980 में बी. शिवरामन समिति की स्थापना की गई

इस समिति ने लगभग 2 वर्षों बाद अपनी रिपोर्ट में यह कहा कि भारत के किसानों और लघु उद्योगों के लिए एक बैंक का निर्माण किया जाना चाहिए जो उनकी वित्तीय आवश्यकताओं को पूरा कर सकें

अपनी स्थापना के वर्ष 1982 में ही नाबार्ड को भारतीय रिजर्व बैंक से भी मान्यता मिल गई और भारतीय रिजर्व बैंक ने कृषि ऋणों, कृषि पुनर वित्त और कृषि संबंधित आगामी योजनाओं के लिए इस बैंक को उत्तरदाई बना दिया

यह बैंक भारत की आर्थिक राजधानी मुंबई में स्थित है और वहीं पर इसका मुख्य कार्यालय भी स्थित हैं

वर्तमान में इसके मैनेजिंग डायरेक्टर गोविंदा राजुला चिंटूला है और साथ ही इसकी आरक्षित निधि वर्तमान में 81 करोड़ रुपए हैं

तो कुछ इस प्रकार से Nabard Ki Sthapna हुई थी


नाबार्ड की स्थापना करने के उद्देश्य

स्वतंत्रता से लेकर आज तक भारत में जिन भी बैंकों की स्थापना की गई है उनके पीछे सरकार का कोई ना कोई उद्देश्य जरूर रहता है जैसे कि पंजाब नेशनल बैंक जो कि भारत का सबसे पहला बैंक माना जाता है आजादी के समय इसी बैंक में सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी

इन्हीं सब बैंकों की तर्ज पर 1982 में भारत सरकार द्वारा इस नाबार्ड बैंक की स्थापना की गई थी जिसके उद्देश्य निम्नलिखित हैं :

  • जैसा कि भारत के राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने भी कहा था कि भारत की आत्मा गांवों में बसती है और अगर यदि हम भारत का विकास करना चाहते हैं तो हमें पहले गांवों का विकास करना होगा इसी गांधी जी की बात को तर्ज पर रखते हुए नाबार्ड की स्थापना की गई थी और इसका उद्देश्य इसी ग्रामीण अर्थव्यवस्था को आगे बढ़ाना है
  • भारत का किसान वर्ग जो कि सबसे ज्यादा वित्तीय संसाधनों की कमी से जूझता है इसी कमी को पूरा करने के लिए भी कहीं ना कहीं नाबार्ड की स्थापना करना जरूरी था जो कि उन्हें एक फाइनेंशियल सपोर्ट प्रदान करके उनके सेक्टर में उन्हें आगे बढ़ा सके
  • नाबार्ड के द्वारा मात्र कुछ शर्तों और मात्र कुछ संख्या की ब्याज दरों पर ही किसानों को सुलभ लोन प्रदान कराया जाता है जिससे किसान अपनी खेती में उस लोन का प्रयोग करके अपने और अपने देश दोनों का फायदा कर सकते हैं और अपनी अर्थव्यवस्था में भूमिका को बढ़ा सकते हैं
  • छोटे उद्योगों जो कि विशेषकर भारत के ग्रामीण क्षेत्रों में स्थापित किए जाते हैं उनके लिए भी यह नाबार्ड बैंक उचित ब्याज दरों पर लोन प्रदान कराता है और उन्हें आगे बढ़ने के मौके प्रदान करता है जिससे कि वह भारत के बड़े उद्योगों के लिए कच्चा माल उपलब्ध करा सके तो कहीं ना कहीं इन ग्रामीण उद्योगों को आगे बढ़ाना भी इस नाबार्ड बैंक का उद्देश्य था
  • भारत सरकार यह भी चाहती थी कि भारत के ग्रामीण क्षेत्रों और ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए एक ऐसा उत्तरदाई संस्थान होना चाहिए जो कि भारत के ग्रामीण क्षेत्रों की वित्तीय व्यवस्था को संभाल सके ताकि सरकार को इन ग्रामीण क्षेत्रों की ओर ज्यादा ध्यान देने की आवश्यकता ना महसूस हो और उसी समय को वे किसी अन्य विकास कार्यों में खर्च कर सके
  • इस नाबार्ड की भूमिका केवल बैंक तक ही सीमित नहीं है बल्कि यह ग्रामीण अर्थव्यवस्था की जानकारी को भारत सरकार तथा भारतीय रिजर्व बैंक के पास भी साझा करता है और साथ ही साथ राज्य सरकारों के साथ अपनी तालमेल को बैठा कर कई प्रकार की उचित नीतियों का निर्धारण भी करता है

नाबार्ड के कार्य

जब हम भारत के पहले ग्रामीण बैंक नाबार्ड के कार्यों की बात करते हैं तो पहली नजर में उसके कार्य अन्य सभी बैंकों के समान ही हमें दिखाई पड़ते हैं

परंतु जब हम इसे गहराई से समझने की कोशिश करेंगे तो हम पाएंगे कि इसका विशेष केंद्र बिंदु भारत के विभिन्न किसान वर्ग और गांव हैं और उन्हीं कामों में निवास करने वाले लोग हैं

  • इस नाबार्ड बैंक का सबसे मुख्य कार्य हैं भारत के ग्रामीण लोगों और किसानों को सस्ती ब्याज दरों पर ऋण उपलब्ध कराना था कि वह अपना विकास समुचित रूप से कर पाए
  • मुख्यता नाबार्ड तीन प्रकार के ऋण किसानों और ग्रामीण लोगों को उपलब्ध कराती हैं जो कि निम्नलिखित हैं :

  1. अल्पकालिक ऋण : इस प्रकार उपलब्ध कराए गए ऋण की अवधि अधिकतम 15 माह होती हैं और यह सामान्य कृषि उत्पादों और उद्योगों के लिए नाबार्ड द्वारा प्रदान कराया जाता है
  2. मध्यम अवधि ऋण : इस प्रकार उपलब्ध कराए गए ऋण की अवधि अधिकतम 15 माह से लेकर 7 वर्षों तक होती हैं और इस प्रकार के ऋण नाबार्ड द्वारा विभिन्न प्रकार के विकास कार्यों और क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों को अनुदान के रूप में उपलब्ध कराए जाते हैं
  3. दीर्घकालीन ऋण : यह नाबार्ड द्वारा उपलब्ध कराए जाने वाले सबसे बड़े ऋण हैं और इनकी अवधि अधिकतम 25 वर्ष तक होती हैं और इस प्रकार के ऋण नाबार्ड बैंक द्वारा भूमि विकास तथा भूमि संरक्षण एवं अन्य लंबे समय तक चलने वाली ग्रामीण योजनाओं के लिए उपलब्ध कराए जाते हैं

  •  ग्रामीण क्षेत्रों में किसी आपातकालीन स्थिति में भी वित्तीय लोन के रूप में नाबार्ड बैंक द्वारा अच्छी खासी राशि उपलब्ध कराई जाती है जैसे कि अगर किसी क्षेत्र में सैन्य कार्रवाई या सुखा, अकाल आदि प्राकृतिक आपदाएं आ जाए तो यह जिम्मेदारी नाबार्ड की बनती है कि वह उस क्षेत्र को वित्तीय संसाधन उपलब्ध कराएं
  • ग्रामीण क्षेत्रों में कई विकास योजनाओं तथा अनुसंधान कार्यों के लिए भी इस नाबार्ड बैंक द्वारा राशि उपलब्ध कराई जाती हैं
  • नाबार्ड बैंक ने अपने प्रशिक्षण कार्यालयों के रूप में लखनऊ और कर्नाटक के बेलापुर तथा बैंगलोर में विभिन्न ग्रामीण विकास संस्थानों की स्थापना की है इसके अलावा पुणे में कृषि बैंकिंग कॉलेज की भी स्थापना नाबार्ड बैंक द्वारा की गई है
  • नाबार्ड बैंक द्वारा केंद्र सरकार द्वारा संचालित विभिन्न ग्रामीण योजनाओं की जानकारी को अर्थव्यवस्था के छोर पर खड़े अंतिम व्यक्ति तक भी पहुंचाया जाता है जो कि भारत के गांवों से संबंधित हैं
  • भारतीय रिजर्व बैंक के एजेंट के रूप में भी कहीं ना कहीं नाबार्ड बैंक को जाना जाता है क्योंकि भारत के ग्रामीण क्षेत्रों में जितनी भी कृषि संबंधी गतिविधियां होती हैं, उन सभी का निरीक्षण करना और उनसे संबंधित सभी जानकारियों को भारत सरकार और भारतीय रिजर्व बैंक तक पहुंचाना इसी नाबार्ड बैंक का कार्य होता है

नाबार्ड बैंक की संरचना

अब आप Nabard Ki Sthapna और उसके कार्यों को समझ गए होंगे तो अब इसकी संरचना को भी समझना हमारे लिए जरूरी है कि आखिर इतना बड़ा ग्रामीण बैंक भारत में किस प्रकार से कार्य करता है

क्या भारत के प्रत्येक छोटे बड़े गांव में इस नाबार्ड बैंक की एक शाखा होती है या फिर कोई एजेंट के रूप में यहां पर कार्य करता है इन्हीं सब सवालों को हम इस बैंक की संरचना द्वारा समझ सकते हैं

  • एक मुख्य शाखा और नियंत्रक के रूप में महाराष्ट्र की राजधानी मुंबई में इस नाबार्ड बैंक की मुख्य शाखा विद्यमान है
  • यह मुख्य शाखा विभिन्न राज्यों में स्थित इस बैंक की क्षेत्रीय कार्यालय को आदेश देता है और उन्हें अपने नियंत्रण में रखती है
  • यह क्षेत्रीय कार्यालय जिला स्तरों पर छोटे-छोटे कार्यालय की स्थापना को नियंत्रित करते हैं और उन्हें किस प्रकार से अपने नाबार्ड के अधिनियम के अंतर्गत कार्य करना है और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को चलाना है इसकी जानकारी भी प्रदान कराते हैं
  • इसके अलावा राज्य सरकारों की भर्ती एजेंसी तथा केंद्र सरकार की भर्ती एजेंसियों द्वारा बैंक के लिए कर्मचारियों की नियुक्ति भी की जाती है और उन्हें इस बैंक से संबंधित विभिन्न प्रकार की ट्रेनिंग भी प्रदान कराई जाती हैं
  • यह नाबार्ड बैंक छोटे-छोटे क्षेत्रीय स्तरों पर कई एजेंटों की नियुक्ति भी करता है जो कि इस से संबंधित विभिन्न स्कीमों को भारत के गांवों के लोगों तक पहुंचाते हैं और अपने अपने क्षेत्र गांवों में इसका प्रसार करते हैं

इस तरह नाबार्ड बैंक अपनी एक कुशल संरचना के बलबूते पर पूर्णरूपेण संचालित किया जाता है


FAQs : Nabard की स्थापना कब हुई – विकिपीडिया

सवाल : Nabard Ki Sthapna Hindi 

इसकी स्थापना 12 जुलाई 1982 को की गई थी

सवाल : नाबार्ड की स्थापना किस समिति की सिफारिश पर की गई थी?

इसकी स्थापना बी शिवरामन समिति की सिफारिश पर की गई थी

सवाल : नाबार्ड बैंक के वर्तमान प्रबंध निदेशक कौन हैं?

इसके वर्तमान प्रबंध निदेशक गोविंदा राजुला चिंटूला है

सवाल : नाबार्ड बैंक कितने प्रकार के ऋण उपलब्ध कराता है?

यह बैंक तीन प्रकार के ऋण उपलब्ध कराता है अल्प अवधि ऋण, मध्यकालीन ऋण तथा दीर्घकालीन ऋण

सवाल : नाबार्ड बैंक की स्थापना करने का मुख्य उद्देश्य क्या था?

इसकी स्थापना का मुख्य उद्देश्य था भारत की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को उचित रूप से वित्तीय संसाधन उपलब्ध कराना


Conclsuion

तो पाठको हम आशा करते हैं कि आपको आज का हमारा यह लेख Nabard Ki Sthapna बहुत ज्यादा पसंद आया होगा और इसे पढ़कर आपको नाबार्ड बैंक के बारे में संपूर्ण जानकारी प्राप्त हो गई होगी

अगर आपको यह लेख पसंद आया हो तो इस लेकर Comment Box में अपने Suggestions को जरूर लिखें ताकि आगे आने वाले समय में हम आपके सुझावों के अनुसार ही इसी प्रकार के ज्ञानवर्धक लेख लाते रहे और आपके ज्ञान में सकारात्मक वृद्धि करते रहे

इसलिए को पढ़ने के लिए आपका बहुत-बहुत आभार और धन्यवाद

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