पृथ्वी कैसे बनी (Prithvi kaise Bani) पृथ्वी का इतिहास

पृथ्वी कैसे बनी : हमारे पृथ्वी का निर्माण अब से 4.5 मिलियन साल पहले हुआ था, पृथ्वी पहले सिर्फ कणों का बादल हुआ करता था, पृथ्वी ही हमारे सोलर सिस्टम में इकलौता नीला गृह है जहां पर पानी हवा धुप, और जीवन मौजूद है

हमारे विज्ञानिकों के अनुसार हमारे पृथ्वी का निर्माण कानों से हुआ था और जब यह एक गोले में तब्दील हुआ तब यह लाल दहकते लावा का एक गोला था और यह हमारी आज की पृथ्वी से 4 गुना छोटा था

आज हमारे सौर्य मंडल की जगह पे बहुत तरह के धुल के बादल और गैस हुआ करती थी, सूर्य के जन्म से ही और ग्रहों का जन्म हो पाया है तो यदि धरती की कहानी जाननी है तो सूरज के जन्म का इतिहास भी जानना होगा

आपके इस आर्टिकल में हम धरती कैसे बनी, कैसे जीवों का जन्म हुआ आदि के बारे में आपको विस्तार में बताएँगे

धरती के जन्म की कहानी बहुत अनोखी है क्योंकि यह एक समय में लावा के तापमान जितनी गरम थी और एक टाइम पर बर्फ से ढकी हुई थी, धरती को रहने लायक बनने में मिलियन साल लग गए और हम इंसानों ने बहुत कम समय पर इसको अंदर से खोखला करना शुरू कर दिया है जोकि बहुत शर्म की बात है

धरती के जन्म का इतिहास सूर्य के जन्म से जुड़ा हुआ है इसलिए हमें पहले जानना पड़ेगा कि हमारे सौरमंडल का निर्माण कैसे हुआ क्योंकि इसी तरह से हमारी धरती का निर्माण भी हुआ है हमारे सौरमंडल की वजह से ही आज हमारी धरती अस्तित्व में है

 

Prithvi kaise bani
Prithvi kaise bani in Hindi 

 

विषय

सब से पहले सूर्य का निर्माण हुआ

हमारे धरती के बारे में उसके निर्माण के बारे में मैन्युअल कैंट नाम के वैज्ञानिक ने अपनी बुक यूनिवर्सल नेचुरल हिस्ट्री एंड थ्योरी ऑफ द हेवन ने बताया है जिसे आगे चलकर एक और वैज्ञानिक ले अपनी थ्योरी  कुछ बदलाव करके विस्तार में बताया है

इन दोनों विज्ञानिक की थ्योरी को ही हम स्वीकार करते हैं और आज उसी के बारे में चर्चा की जाती है आज जो भी कहीं पर भी पृथ्वी के इतिहास की बात करता है वह इन्हीं दोनों साइंटिस्ट की किताब से लिया गया है,

इस बुक में सोलन न्यूक्लियर डेस्क मॉडल के हिसाब से बताया गया है कि कैसे हमारे सूर्य का जन्म हुआ और कैसे ग्रेविटी का जन्म हुआ और उसके बाद कैसे पृथ्वी का जन्म हुआ, पृथ्वी छोटे से बड़ी कैसे बनी, पृथ्वी इतनी ठंडी कैसे थी आदि

Prithvi Kaise Bani से पहले जानना ज़रूरी है सूर्य कैसे बना 

आज से कुछ 450 करोड़ साल पहले हमारे यूनिवर्स में डस्ट के कण का और गैस का बादल हुआ करता था जिससे साइंटिफिक ली नेबुला कहते हैं, इस नेबुला का निर्माण ब्लैक होल और स्टार की वजह से होता है

आज नेबुला की मदद से हमारे सूर्य का निर्माण हुआ हमारी पृथ्वी का निर्माण हुआ हमारी पृथ्वी के कारण हमारे पृथ्वी का वातावरण आदि का निर्माण हुआ इसीलिए नेबुला को हम जन्नत के बादल भी कहते हैं

जैसे जैसे ही नेबुला में मैटर बढ़ता गया वैसे-वैसे इस मैटर की ग्रेविटी भी बढ़ती गई यानी जो नेबुला फैला हुआ था वह ग्रेविटी की वजह से गोले के आकार में आने लगा

क्योंकि ग्रेविटी के नियमों के हिसाब से ग्रेविटी गोले का आकार ही लेती है जिसके कारण वह एक फैले हुए गैस के गैस के बादल की जगह पर एक गोल गैस का बादल बनने लगा था

समय के साथ-साथ स्टार और ब्लैक होल के कारण हमारे नेबुला का मास और भी बढ़ रहा था

जिसके कारण ज्यादा मांस होने के कारण ज्यादा तेजी से अपनी रोटेशन कर पा रहा था और ज्यादा ठोस गोले में तब्दील हो पा रहा था और इसी बदलाव में एक और चीज़ हुई जिसके कारण हमारा नेबुला बिखर गया

हमारे नेबुला के पास में एक स्टार फट गया जिसके कारण उससे निकलने वाला फोर्स इतना ज्यादा था कि उसने हमारे नेबुला के सेंटर को पूरी तरह से कोलैप्स कर दिया,

हमारा नेबुला गोले के आकार में ना होकर एकदम फ्लैट हो गया जिसके कारण नेबुला के अंदर मौजूद एक-एक कण बिखर गया, यह कण अलग अलग संख्या में अलग हुए और यह कण धीरे धीरे आस पास के कणों को अपने पास खीचने लगे

अलग-अलग जगह पर नेबुला  के कण एक दूसरे को आपस में खींचने लगे और धीरे धीरे कण इकठ्ठा होने लगे इसका एंगुलर मोमेंटम यानी जिस स्पीड से घूम रहा था वह बढ़ने लगी

और यदि हमारे फिजिक्स के हिसाब से जो चीज़ जितनी छोटी होगी उसके घूमने की गति उतनी तेज होगी इसी कारन कणों के इकठ्ठा होने के कारन नेबुला की स्पीड और तेज हो चुकी थी

जैसे-जैसे हमारे नेबुला की स्पीड बढ़ रही थी वैसे वैसे हमारे नेबुला के केंद्र पर खिंचाव बढ़ता जा रहा था हमारी केंद्र की ग्रेविटी बढ़ रही थी और पूरे नेबुला का माल धीरे-धीरे करके हमारे केंद्र पर केंद्रित हो रहा था

और केंद्र पर प्रेशर इतना बढ़ गया कि हमारे केंद्र का टेंपरेचर भी बढ़ने लगा क्योंकि प्रेशर टेंपरेचर के डायरेक्टली प्रोपोर्शनल होता है, यानी प्रेशर बढ़ने के साथ तापमान का बढ़ना तय है

नेबुला का टेंपरेचर इतना बढ़ने लगा कि उसके कणों में हाइड्रोजन एटम आपस में मिलकर हिलियम बनाने लगे

ऐसे ही हमारे सूर्य का निर्माण हुआ और जब सूर्य का निर्माण हुआ तो इसे प्रोटोस्टार कहा जाने लगा

 

अन्य गृह और धरती का निर्माण 

 

अन्य गृह और धरती का निर्माण 

 

इस प्रोटोस्टार के आस पास गैस और कण अभी भी घूम रहे थे, और इनके आसपास घूमने वाले तत्वों में सिर्फ मेटल्स और सिलिकेट्स ही ऐसे तत्व थे जो प्रोटोस्टार से निकलने वाले हीट को क्या गर्मी को झेल सकते थे जिसके कारण आगे चलकर उन्हीं से  प्लैनेट्स का निर्माण हुआ

Protostar के आसपास घूम रहे कणो में बहुत ही तेजी से टकराव हुआ और धीरे-धीरे कर कर इसी टकराव के कारण हमारे प्लेनेट का जन्म हुआ हमारे ग्रहों का जन्म हुआ जो ग्रह ज्यादा ऊर्जा नहीं बर्दाश्त कर पा रहे थे वह सूर्य से या प्रोटोस्टार से दूर चले गए और जो बर्दाश्त कर पा रहे थे वह आगे आ गए

हमारी पृथ्वी का निर्माण सूरज के आसपास मौजूद मेटल और सिलीकेट और एस्ट्रॉयड की वजह से हुआ है

 

धरती कैसे इतनी बड़ी बनी 

उस समय पृथ्वी और मंगल ग्रह के बीच एक और ग्रह था जो मंगल ग्रह से 3 गुना ज्यादा बड़ा था उसका नाम थीया गृह था

पृथ्वी पर ग्रेविटी होने के कारण ग्रेविटी के कारण एस्ट्रॉयड भी पृथ्वी के आसपास घूमने लगे और वह एस्ट्रॉयड पृथ्वी पर गिरने लगे

ऐसी ही क्रिया हमारे पड़ोसी प्लेनेट थीया पर भी हो रही थी जिसके कारण कुछ समय में थीया और पृथ्वी एक दूसरे के बहुत पास आ गए

एक समय के बाद इन दोनों ग्रहों में टकराव हुआ और यह दोनों गृह मिलके एक गृह बन गये, जिसे आज हम पृथ्वी के नाम से जानते है, और धरती का एक टुकड़ा टकराव के कारन हवा में घूमने लगा और ग्रेविटी के कारन पृथ्वी के ही आस पास घूमने लगा जो की आगे चलकर चाँद बना

 

पृथ्वी में बदलाव और विकास 

 

पृथ्वी में बदलाव और विकास 

Wikipedia

उस समय पृथ्वी पर एक ही समुद्र हुआ करता था जिसका तापमान 19 डिग्री था जो कि एक लावे का समुंद्र था इसके बाद हमारे पृथ्वी पर बदलाव हुए और हमारी पृथ्वी आज जीने लायक बन पाई है

इन्हीं सब बदलाव के कारण आज हमारे पृथ्वी कैसे बनी आइए पॉइंट में देखते है

 

  • पृथ्वी पर पानी की उपस्थिति होना 

समय के साथ साथ पृथ्वी ठंडी हो रही थी और पृथ्वी के भारी तत्व धातु जा रेडियोएक्टिव पदार्थ पृथ्वी के केंद्र में केंद्र में जाकर इकट्ठा होने लगे और हल्के पदार्थ पृथ्वी की सतह पर आ गए लाखों सालों तक पृथ्वी पर एस्ट्रॉयड जिसे हम उल्कापिंड भी कहते हैं उनकी बरसात हुई जिसके कारण पृथ्वी पर मिनरल्स, पानी, नमक जैसी चीजें उल्कापिंड के कारण ही पृथ्वी पर क्लोरो सालों तक आने लगी


  • जीवन संभव हो पाना 

उल्कापिंडो की बरसात होती रही इन्हीं उल्का पिंडों के कारण हमारे पृथ्वी की सतह पानी से ढकने लगी यही वह समय था जब हमारे पृथ्वी पर उनका निर्माण हुआ जिसके कारण आज पृथ्वी पर जीवन संभव हो पाया है


  • ज्वालामुखी का बनना 

केंद्र में गर्मी और ऊपर ठंडक होने के कारण हमारे धरती में सूक्ष्म जीवों का निर्माण हुआ जो धूप से पालते थे और वह ऑक्सीजन  छोड़ते थे जिसके कारण हमारे पृथ्वी पर ऑक्सीजन बनने लगा,  हमारे पृथ्वी की ऊपरी सतह उल्का पिंडों के कारण पानी से ढकी हुई थी और ठंडी थी

पर हमारे अंदर रेडियोएक्टिव पदार्थ थे हमारी पृथ्वी के अंदर रेडियोएक्टिव पदार्थ थे जो कि समय-समय पर गर्म होते रहते थे और इन्हीं दोनों ऊपर ठंडा पानी और नीचे गरम पदार्थ होने के कारण ज्वालामुखी ने जन्म लिया


  • भूमि का निर्माण 

जब हमारे धरती के अंदर की गर्मी बाहर ना निकल पाए  तो ऐसे समय ज्वालामुखी का निर्माण होता है और एक लंबे समय तक हमारे धरती गर्मी बाहर नहीं निकल पा रही थी जिसके कारण जगह-जगह पर ज्वालामुखी ज्वालामुखी फूटने लगे

और आने वाले कुछ सालों तक ऐसे ही ज्वालामुखी निकलते रहे जिसके कारण हमारे धरती पर आज जमीन का निर्माण हो पाया है इन्हीं ज्वालामुखी के निकलने और बंद होने से ही हमारी धरती की सतह बन पाई है


  • तापमान में स्थिरता का आना 

एक समय के बाद हमारी पृथ्वी का वातावरण स्थिर होने लगा जब हमारी पृथ्वी पर उल्का पिंडों की बरसात कम होने लगी और ज्वालामुखी भी शांत होने लगे उस समय हमारे धरती पर पानी और जमीन दोनों मौजूद होने लगे और हमारी धरती का तापमान भी स्थिर था

उन समय हमारे धरती पर 1 दिन 12 घंटे का होता था


  • जीवन और ऑक्सीजन का जन्म 

पानी के अंदर सूक्ष्म जीवों का जन्म हो रहा था यह ऐसे जीव थे जो ऑक्सीजन छोड़ते थे और यह हमारी धरती में मौजूद मिनरल्स, धूप आदि से बड़े होते थे इन्हीं जीवों के कारण हमारी पृथ्वी पर ऑक्सीजन की मात्रा बढ़ती गई

इनही माइक्रो बैक्टीरिया की वजह से हमारे धरती पर ऑक्सीजन की मात्रा बढ़ती गई और हमारे वातावरण के आसपास ओजोन लेयर का निर्माण हुआ


  • ऑक्सीजन से वातावरण का निर्माण 

ऑक्सीजन के कारण ही हमारे पृथ्वी का वातावरण बनने लगा, यह सूक्ष्मजीव हमारे पृथ्वी के कोने कोने में फैल गए और हमारे वातावरण में ऑक्सीजन की मात्रा बढ़ती गई, और  एक समय पर बहुत ज्यादा ऑक्सीजन की मात्रा बढ़ने के कारण एक समय पर इन सूक्ष्मजीवों का अंत होने लगा


  • एसिड रेन और धरती का बर्फ का गोला बन जाना 

हमारे  वातावरण में मौजूद ऑक्सीजन और आयरन में रिएक्शन होने लगी जिसके कारण हमारी जमीन लाल होने लगी और हमारी जमीन में क्रैक्स आने लगे

अंदर का लावा फुट के खुला रहने लगा और जिसके कारण हमारे वातावरण में कार्बोहाइड्रेट की मात्रा बढ़ने लगी जिसके कारण हमारे पृथ्वी पर एसिड रेन (अम्लीय वर्षा) होने लगी हमारे पृथ्वी का तापमान घटने लगा घटते घटते  यह इतना घाट गया की हमारे पृथ्वी पर मौजूद पानी बर्फ बन गया और हमारी पृथ्वी बर्फ से ढक गई

बर्फ के सफेद और चमकीली होने के कारण वह सूरज की किरणों को रिफ्लेक्ट कर दे रही थी इसके कारण सूरज की किरणें पृथ्वी पर नहीं आ पा रही थी और बर्फ जमी रह जा रही थी


  • ज्वालामुखी से जीवन की शुरुआत 

कई  लाखों सालों तक ऐसे ही बर्फ जमी रही,  पर हमारे पृथ्वी के अंदर की गर्मी ज्वालामुखी के रूप में फिर से  बाहर निकली और बहुत जगह ज्वालामुखी फूटे जिसके कारण बर्फ पिघलनी  शुरू हो गई और हमारे जमीन के अंदर ऑक्सीजन की मात्रा बढ़ने लगे


  • समुन्द्र, जल जीवन और पेड़ पौधों का जन्म 

हमारे धरती के अंदर जीवों का निर्माण तेजी से होने लगा और वह वातावरण के हिसाब से खुद को ढाल लेते थे

धीरे-धीरे पेड़ पौधों का जन्म हुआ समुद्र के अंदर पेड़ पौधे जीवन आदि विकसित हो रहे थे,  और वह तापमान के हिसाब से अपने आप को ढाल ले रहे थे और उनका पूरी तरह से खात्मा नहीं होता था

जब ज्वालामुखी ने बर्फ को पिघलाया तो फिर से सूक्ष्म जीवों के कारण ऑक्सीजन की मात्रा बढ़ी और जमीन के अंदर पानी में फैलने वाले पेड़ धीरे धीरे कर के जमीन पर भी फैलने लगे ऐसे ही हमारा वातावरण बना, ऑक्सीजन की वजह से धरती पर होने वाली एसिड रेन कम होने लगी और ओजोन लेयर मोटी होने लगी और जीवन पृथ्वी पर अच्छे से पनपने लगा


  • धरती पर जीवन और वनस्पति का विकास 

वक्त के साथ-साथ जमीन पर पेड़ पौधे, जानवर, आदमी का जन्म शुरू हुआ पानी के अंदर रहने वाले जानवरों ने जमीन पर रहना शुरू कर दिया और वह अपने रहने के तरीके आदि के कारण अलग-अलग तरह के जानवर में बदलने लगे

पेड़ों की लंबाई भी बहुत ऊपर ऊपर तक होने लगी थी 80 से 100 फीट के पेड़ होने लगे, और एक घने जंगल बन रहे थे समुद्री जानवर जंगली जानवर में बदल रहे थे

और जल जीवन के साथ-साथ थल जीवन भी बसने लगा, अब आप समझ गए होंगे की पृथ्वी कैसे बनी


  • डायनासोर का युग 

पृथ्वी पर वातावरण बन गया था,पृथ्वी का वातावरण स्थिर हो गया था पृथ्वी का तापमान अचानक से बदल नहीं रहा था यही वह समय था जब डायनासोर ने अपना राज किया डायनासोर पानी से निकलने वाले जानवर थे जो धरती पर रहने लगे थे और वह आगे चलकर अपने हिसाब से बड़े और ताकतवर होने लगे थे और उन्होंने करोड़ों सालों तक पृथ्वी पर राज किया


  • हिमालय का निर्माण 

पृथ्वी की धरती विभाजित हो रही थी जिससे पहाड़ बन रहे थे, अफ्रीका से एक भाग टूटकर आज के तिब्बत से टकराया और हिमालय का निर्माण हुआ


  • एशट्रॉयड से टक्कर और धरती पर जीवन का विनाश 

पृथ्वी का एक बार और विनाश होने को था हिमालय से भी बड़ा बहुत बड़ा एक एस्ट्रॉयड पृथ्वी से आकर टकरा गया जिसकी स्पीड 80000 किलोमीटर पर घंटे की थी

जिस समय यह पृथ्वी से टकराया वह ऊर्जा इतनी थी जैसी कि  100 परमाणु बम साथ में पृथ्वी पर फटने पर हो, इतनी उर्जा के कारण डायनासोर पेड़ पौधे आदि का विनाश हो गया

समुद्र में बाढ़ आ गई, भूकंप, आग आदि के कारण पृथ्वी का विनाश होने लगा कुछ ही घंटों में ही पृथ्वी का वातावरण पूरी तरह से दूषित हो गया डायनासोरस भूखमरी से मर चुके थे

पृथ्वी के वातावरण में ऑक्सीजन की कमी से हो गई थी जो जानवर या जीव धरती के अंदर रहते थे वही इस भूकंप से इस तबाही से बच पाए, धरती के ऊपर वाले जानवर ,जीव कोई भी इस तबाही से बच नहीं पाया था


  • अम्लीय वर्शा और फिरसे जीवन की शुरुआत 

पृथ्वी का वातावरण इतना खराब हो गया कि पृथ्वी की सतह पर धूप पहुँच ही नहीं पा रही थी जिसके कारण पृथ्वी से जहरीली गैसों से भर गई और ऑक्सीजन की कमी के कारण पृथ्वी पर फिर से एसिड रेन हुई

पहले एक बार पृथ्वी का वातावरण बन चुका था इसलिए इसे दोबारा बनने में उसका समय नहीं लगा और बर्फ भी कुछ सालों में पिघल गई और इस बार पृथ्वी की हरियाली और भी अच्छे तरीके से हुई पर डायनासोर गायब हो चुके थे

हरियाली होने लगीं, जीव जंतुओं और वनस्पतियों का जन्म होने लगा और तबसे लेकर आज तक बहुत ज्यादा तबाही नही आई है


  • पृथ्वी पर जीवन का विकास 

जमीन में रहने वाले जीव बाहर आने लगे और जमीनी जीव बंदरों में परिवर्तित हुए और यही बन्दर चलते-चलते इवोल्यूशन के साथ इंसानों में बदल गए ऐसा साइंस में माना जाता है

बंदरों ने खाने की तलाश में जीने की चाह में एक जगह से दूसरी जगह जाना शुरू कर दिया और धीरे-धीरे कर कर तरह-तरह की चीजें करके उन्होंने अपने जीवन को और बेहतर बनाया आगे चलकर यही बंदर इंसान बने

पृथ्वी को जीने लायक बनने में 450 से ज्यादा करोड़ साल लगे और हम इंसानों को बंदरों से इंसान बनने में कुछ लाख साल लगे

और फिर भी हमने कुछ ही सालों में पृथ्वी को बहुत नुकसान पहुंचा दिया है हमने अपनी बुद्धि का इस्तेमाल करके बहुत विकास किया है और यही विकास अब हमारी और हमारी धरती के लिए हानिकारक साबित हो रहा है

यह पृथ्वी की जन्म से लेकर अब तक की कहानी है हमें आशा है की पृथ्वी कैसे बनी यह आपको समझ आ गया होगा

धरती का जन्म नेबुला से हुआम सूर्य के कारन ही धरती पर जीवन संभव है, धरती अभी भी खतरे से खाली नही है, अभी भी यदि कार्बोहायड्रेट बहुत ज्यादा मात्रा में बढ़ा तो एसिड रेन होने के आसार है और धरती पर से जीवन खतरे में पड़ सकता है

 

FAQs: पृथ्वी का जन्म कैसे हुआ

सवाल : धरती का पहला मानव कौन है?

धरती का पहला मानव  स्वायंभुव मनु  थे , यह ही दुनिया के पहले पुरुष है और  पहली स्त्री  शतरूपा थे, हमारे ग्रथों के हिसाब से इनका जन्म ब्रह्मा देव ने प्रकृति के जन्म के लिए किया था

इन दोनों ने ही आगे चलकर और मनुष्यों को जन्म दिया और मानव जाती का निर्माण किया, ऐसा हमार ग्रंथों में लिखा हुआ है

सवाल : सूरज किस चीज से जलता रहता है?

सूर्य के अंदर हाइड्रोजन के कण आपस में मिलके हीलियम बना रहे है इसी रिएक्शन के कारन हीट यानी उर्जा पैदा होती है, जिससे सूरज चमकता है

सवाल : पृथ्वी का जन्म कब और कैसे हुआ?

पृथ्वी का जन्म सूर्य के आस पास घूम रहे एशट्रॉयड के टकराव से हुआ, और आगे चलके एक थीया नाम का गृह पृथ्वी से टकरा गया

और दोनों के मिलने से पृथ्वी का जन्म हुआ पृथ्वी का टुकड़ा जो की टक्कर की वजह से पृथ्वी से अलग हो गया था वह पृथ्वी के चारों और चक्कर लगाता है जिसे हम चाँद कहते है

सवाल : पृथ्वी का असली नाम क्या है?

पृथ्वी का असली नाम पृथ्वी ही है इसे अंग्रेजी में अर्थ(Earth) कहते है

सवाल : दुनिया किसने बनाई?

हिन्दू मान्यता के हिसाब से दुनिया भगवान ने बनाई और विज्ञान के अनुसार पृथ्वी बहुत सारे क्रियाओं का परिणाम है, वह क्रियाएं जो हमारे यूनिवर्स में हो रही है


Conclusion

पृथ्वी कैसे बनी (Prithvi kaise bani) यह तो आपने जान लिया, पर क्या इतना काफी है? पृथ्वी ही एक ऐसा गृह है जहां पर जीवन है

और उस जीवन को भी इंसान ख़त्म करने पर लगे है, हमें पता है की कार्बोहायड्रेट या जहरीली गैसे से फिरसे हमारे वातावरण में गन्दगी को सकती है और फिरसे वही सब हो सकता है जिससे धरती का निर्माण हुआ है

और ऐसे ही एक ही बार में हम इंसानों का अस्तित्व ही ख़त्म हो जायेगा, फिर भी इंसान थोड़े से लालच में हम सब मानवजाती और सभी जीव जंतुओं की ज़िन्दगी मुश्किल में डाल रहा है

हमें आशा है की आपको हमारा आजका आर्टिकल अच्छा लगा होगा, हमें कमेंट ककरे अपने विचार हमारे साथ साँझा करिये, हमारे इस आर्टिकल को पूरा पढने के लिए दिल से शुक्रिया