काल के कितने भेद होते है – काल की परिभाषा (Kal ke Kitne Bhed Hote Hain)

आज का हमारा विषय हिंदी व्याकरण से संबंधित होने वाला है और उस विषय का नाम है Kal ke Kitne Bhed Hote Hain  ।

हम सभी हिंदी के इस विषय को बचपन से पढ़ते आए हैं और हमने अपने स्कूल से लेकर आज तक इस विषय को बार-बार पढ़ा है।

बेशक हमे तो काल की परिभाषा और काल के भेद के बारे में पता है

लेकिन आज भी कही सारे ऐसे लोग है जिन्हे काल के कितने भेद होते है यह पता नहीं है इसीलिए आज के लेख में हम काल किसे कहते है और काल के प्रकार सहित काल की पूरी जानकारी उदाहरण सहित विस्तार में प्रदान करने की कोशिश करेंगे

यदि आप भी हिंदी व्याकरण के महत्वपूर्ण विषय काल के बारे में विस्तार में जानकारी प्राप्त करना चाहते है तो इस लेख को शुरवात से अंत तक जरूर पढ़े और इसे आपने दोस्तों के सात साझा करना न भूले क्यों की शेयरिंग इस केयरिंग न

  • इंग्लिश में काल को टाइम एंड टेंस का जाता है।

काल मुख्य रूप से समय का परिचायक होता है। अंग्रेजी और संस्कृत भाषाओं में भी इससे दर्शाया गया है। प्रत्येक भाषा में इसका अहम योगदान माना जाता है।

 

काल के कितने भेद होते है – Kal ke Kitne Bhed Hote Hain 

 

Kal ke Kitne Bhed Hote Hain 
Kal ke Kitne Bhed Hote Hain

 

काल की परिभाषा 

क्रिया का वह रूप जिससे उसके पूर्ण या अपूर्ण होने का बोध होता है उससे साल कहते हैं।

उदाहरण :

  • राम पुस्तक पढ़ता है।
  • राम ने पुस्तक पढ़ी थी।
  • राम पुस्तक पढ़ेगा।

 

काल के प्रकार 

काल के मुख्यता तीन प्रकार होते हैं।

  1. वर्तमान काल
  2. भूतकाल
  3. भविष्य काल

यह मुख्यता काल के तीन प्रकार होते हैं, जिनके द्वारा हमें काल को समझने में आसानी होती हैं। यह समय के अलग-अलग पक्षों को बताते हैं।

  • वर्तमान काल 

क्रिया का वह रूप जिससे वर्तमान समय में होने का बोध होता है उसे वर्तमान काल कहा जाता है।

यह उस समय को प्रदर्शित करता है जो कि वर्तमान में चल रहा है या उन क्रियाओं को प्रदर्शित करता है जो वर्तमान में हो रही है।


वर्तमान काल के कितने भेद होते है

वर्तमान काल के पांच भेद होते हैं।

  1. सामान्य वर्तमान काल
  2. अपूर्ण या तात्कालिक वर्तमान काल
  3. संदिग्ध वर्तमान काल
  4. संभाव्य वर्तमान काल
  5. आज्ञार्तक वर्तमान काल

  • सामान्य वर्तमान काल 

यह वर्तमान काल का एक प्रकार होता है। इसके अंत में ता है, ती है, ते हैं आदि शब्दों का प्रयोग होता है।

क्रिया का वह रूप जो सामान्य वर्तमान काल में होने का बोध कराता है उसे सामान्य वर्तमान काल कहा जाता है।

उदाहरण :

  • राम नाचता है।
  •  पूजा खाना बनाती है।
  •  लड़के शोर करते हैं।

  • अपूर्ण या तात्कालिक वर्तमान काल 

क्रिया के जिस रुप से कार्य की निरंतरता का बोध होता है उसे अपूर्ण वर्तमान काल कहा जाता है। इसके अंत में रहा है, रही है, रहे हैं, रहा हूं आदि शब्दों का प्रयोग होता हैं।

उदाहरण :

  • राम नाच रहा है।
  • सीता नहा रही हैं।
  • लड़के शोर कर रहे हैं।
  • मैं जयपुर में रह रहा हूं।

  • संदिग्ध वर्तमान काल 

क्रिया  का वह रूप जहां संदेह हो पर वर्तमान का संदेह ना हो उसे संदिग्ध वर्तमान काल का जाता है। इसके अंत में ता होगा, ती होगी, ते होंगे आदि शब्दों का प्रयोग होता है।

उदाहरण :

  • राम पत्र लिखता होगा।
  • सीता नहाती होगी।
  • लड़के नाचते होंगे।

  • संभाव्य वर्तमान काल 

क्रिया का वह रूप जिससे कार्य होने की संभावना का बोध होता है उसे संभाव्य वर्तमान काल कहते हैं। इसमें केवल संभावना प्रकट होती है ना की पूर्ण रूप से कार्य होता है इसीलिए इसे संभाव्य वर्तमान काल कहा जाता है

इसके अंत में हो, ई शब्द आते हैं।

उदाहरण : 

  • शायद राम आया हो।
  • वह आए हो।
  • सीता मंदिर गई हो।

  • आज्ञाथर्क वर्तमान काल 

प्रिया के जिस रुप से वर्तमान समय में आज्ञा देने का बोध हो उसे आज्ञापक वर्तमान काल कहते हैं।

 उदाहरण :

  • राम अब तुम पढ़ो।
  • सीता बाजार जाओ।
  • राम तुम अपना होमवर्क करो।
  • राधिका तुम आओ।

  • भूतकाल 

यह भूतकाल में हुई चीजों को दर्शाता है इसके द्वारा हमें यह पता चलता है कि किसी भी कर्ता द्वारा भूतकाल में कौन-कौन से कार्य को संपादित किया गया।

क्रिया का वह रूप जिससे बीते हुए समय में कार्य होने का बोध हो उसे भूतकाल कहते हैं।


भुतकाल के कितने भेद होते है

भूतकाल के 6 भेद होते हैं।

  1. सामान्य भूतकाल
  2. आसन्न भूतकाल
  3. पूर्ण भूतकाल
  4. अपूर्ण भूतकाल
  5. संदिग्ध भूतकाल
  6. हेतु हेतु मद भूतकाल

  • सामान्य भूतकाल 

क्रिया का वह रूप जिससे यह ज्ञात होता है कि कार्य बीते हुए समय में हुआ परंतु यह ज्ञात ना हो कि कार्य को समाप्त हुए कितना समय हुआ है, इसे ही सामान्य भूतकाल कहा जाता है।

इसकी पहचान  यह है कि इसके शब्द के अंत में आ, इ, ए आदि शब्द आते हैं।

उदाहरण :

  • राम विद्यालय गया।
  • सीता ने कहानी सुनाई।
  • बच्चे पढ़ कर घर चले गए।

उपरोक्त उदाहरणों द्वारा हमें सामान्य भूतकाल का परिचय होता है। सामान्य भूतकाल में भूतकाल में होने वाली सामान्य घटनाओं का परिचय होता है इसी कारण इसे सामान्य भूतकाल कहा जाता है।


  • आसन्न भूतकाल 

आसन का अर्थ निकटता होता है। क्रिया का वह रूप जिससे पता चले कि कार्य बीते समय में हुआ है लेकिन कार्य समाप्त हुए अधिक समय नहीं हुआ है अर्थात की किसी कार्य को समाप्त हुए कुछ एक समय हुआ है।

उदाहरण :

  • राम विद्यालय गया है
  • सीता ने कहानी सुनाई है

इसकी पहचान इसके द्वारा की जा सकती है कि इसके वाक्य के अंत में या है, ई है, आ है, ए है आदि शब्द आते हैं।


  • पूर्ण भूतकाल 

क्रिया के जिस रुप से पता चले कि कार्य को पूर्ण हुए बहुत समय बीत चुका है उसे पूर्ण भूतकाल कहते हैं। इसकी पहचान यह है कि इसके वाक्य के अंत में या था, ई थी, ए थे आदि शब्द आते हैं।

उदाहरण :

  • राम विद्यालय गया था।
  •  सीता ने कहानी सुनाई थी।
  •  बच्चे पढ़ कर घर चले गए थे।

  • अपूर्ण भूतकाल 

क्रिया का वह रूप जिससे पता चले कि कार्य बीते समय में हो रहा है किंतु उसकी समाप्ति के विषय का बोध ना हो उसे अपूर्ण भूतकाल कहते हैं।

इसकी पहचान के लिए इसके वाक्य के अंत में रहा था, रही थी, रहे थे आदि शब्द आते हैं।

उदाहरण :

  • राम विद्यालय जा रहा था।
  •  सीता कहानी सुना रही थी
  •  वे पार्क में घूम रहे थे।

  • हेतु हेतु मद भूतकाल 

क्रिया का वह रूप जिससे भूतकाल में होने वाली क्रिया का होना दूसरी क्रिया के होने पर निर्भर हो। इस की पहचान के लिए इसके वाक्य के अंत में ता, तो ,तू, तो आदि शब्दों का प्रयोग किया जाता है।

उदाहरण :

  • यदि राम मेहनत करता तो अवश्य सफल हो जाता।
  • यदि वर्षा होती तो फसल अच्छी होती।
  • यदि बल्लेबाज रन बनाता तो भारत की टीम जीत जाती।

इस प्रकार से भूतकाल के छह प्रकार होते हैं जिनमें भूतकाल को आसानी से समझा जा सकता है और भूतकाल के पक्षों को अलग अलग रूप से बताया जा सकता है।


  • भविष्य काल 

इससे हमें आने वाले समय का बोध होता है कि आने वाले समय में कौन-कौन सी घटनाएं घटित होगी तथा उनमें कर्ता का प्रभाव क्या होगा।

क्रिया का वह रूप जिससे आने वाले समय में कार्य होने का बोध हो उसे भविष्यत काल कहा जाता है।

इसके द्वारा हमें यह पता चलता है कि आने वाले समय में करता द्वारा कौन-कौन से कार्य को संपादित किया जाएगा।


भविष्यकाल के कितने भेद होते है

भविष्यत काल 3 भेद होते हैं।

  1. सामान्य भविष्य काल
  2. संभाव्य भविष्य काल
  3. हेतु हेतु मद भविष्य काल

  • सामान्य भविष्य काल 

यदि सामान्य रूप से बात की जाए तो सामान्य भविष्य काल हमें यह बताता है कि आने वाले भविष्य काल में क्रिया के कर्ता द्वारा किसी कार्य को सामान्य रूप से संपादित किया जाएगा।

क्रिया का वह रूप जिससे आने वाले समय में सामान्य रूप से कार्य होने का वह तो उसे सामान्य भविष्यत काल कहा जाता है।

इसकी पहचान इसके द्वारा की जाती है कि इसके वाक्य के अंत में एगा, एगी, एंगे आदि शब्द होते हैं।

उदाहरण :

  • राम विद्यालय जाएगा।
  • बच्चे पढ़ कर घर जाएंगे ।
  • सीता कहानी सुनाएगी ।
  • राधा खाना पक आएगी।
  • अम्माजी बाजार से मीठे आम लाएगी।

  • संभाव्य भविष्य काल 

क्रिया का वह रूप जिससे आने वाले समय में कार्य होने की संभावना का बोध हो उसे संभाव्य भविष्यत काल कहा जाता है।

सामान्य शब्दों में बात की जाए तो भविष्य काल में किसी कार्य की संभावना मात्र का नाम ही संभाव्य भविष्यत काल हैं।

इसकी पहचान हेतु यह है कि इसके वाक्यों की शुरुआत शायद, ससंभवया, हो सकता है आदि शब्दों से शुरू होती हैं जिनके द्वारा हमें वाक्य में केवल संभावना का बोध होता है ना कि किसी काम के पूर्ण होने का।

उदाहरण :

  • शायद रामप्रकाश जंगल में शेर देखें।
  • हो सकता है आशा कहानी सुनाएं।
  • संभवतया आज बारिश हो जाए।
  • हो सकता है भारत आज यह मैच जीत जाए।
  • हो सकता है आज बोर्ड का रिजल्ट आ जाए।

इस प्रकार से संभाव्य भविष्यत काल में केवल भविष्य काल में होने वाली संभावनाओं को प्रकट किया जाता है ना कि वास्तविक कार्यों को जो कि किसी कर्ता द्वारा किए जाएंगे।


  • हेतु हेतु मद भविष्यत काल 

क्रिया का वह रूप जिससे भविष्य में होने वाली क्रिया किसी अन्य क्रिया पर निर्भर हो तो उसे हेतु हेतु मद भविष्यत काल कहा जाता है।

एक क्रिया का किसी दूसरी क्रिया पर निर्भर रहना ही हैतू हेतू मद भविष्य काल का संपर्क माना जाता है, इस काल में एक क्रिया किसी दूसरी क्रिया पर निर्भर रहती है।

इसकी पहचान यह है कि इसके वाक्यों के अंत में गा, गी, गै, गी आदि शब्द आते रहते हैं।

उदाहरण :

  • यदि रवीना परिश्रम करेगी तो अवश्य सफल हो जाएगी।
  • यदि वर्षा होगी तो फसल अच्छी होगी।
  • यदि बल्लेबाज अच्छे रन बनाएगा तो भारत जीत जाएगी।
  • यदि हम अच्छा प्रधानमंत्री चुनेंगे तो देश का विकास हो जाएगा।

इस प्रकार से काल को तीन भागों में बांटा गया है जिससे कि इसे समझने में आसानी हो सके और साथ ही इसके अंतर्गत भी उन्हें कई भागों में बांटा गया है ताकि उनका आसानी से विश्लेषण किया जा सके।


वर्तमान काल के पांच प्रकार 

वर्तमान काल को अधोलिखित पांच भागों में बांटा गया है जिसके द्वारा हम वर्तमान काल को बेहद आसानी से समझ सकते हैं।

  1. सामान्य वर्तमान काल
  2. अपूर्ण वर्तमान काल
  3. संदिग्ध वर्तमान काल
  4. संभाव्य वर्तमान काल
  5. आज्ञाथर्क वर्तमान काल

भूतकाल के छह प्रकार 

भूतकाल को अधोलिखित 6 भागों में बांटा गया है जिसके द्वारा हम भूतकाल को बेहद आसानी से समझ सकते हैं।

  1. सामान्य भूतकाल
  2. आसन्न भूतकाल
  3. पूर्ण भूतकाल
  4. अपूर्ण भूतकाल
  5. संदिग्ध भूतकाल
  6. हेतु हेतु मद भूतकाल

भविष्यत काल के तीन प्रकार 

भविष्यत काल को अधोलिखित तीन भागों में बांटा गया है ताकि इसे बेहद आसानी से समझा जा सके।

  1. सामान्य भविष्य काल
  2. संभाव्य भविष्य काल
  3. हेतु हेतु मद भविष्य काल

सामान्यता हम काल और समय को एक ही मान लेते हैं परंतु यह अलग-अलग होते हैं।

समय एक भौतिक इकाई है वही बात की जाए काल की तो यह एक व्याकरणिक कोटी होती हैं अर्थात की व्याकरण की एक रचना है।

किसी भी क्रिया के घटित होने के समय के प्रति कर्ता का जो मानसिक रूप से बोध वाक्य में व्यक्त होता है वही व्याकरणिक काल है।

क्रिया किसी गतिविधि के घटित होने के समय का बोध कराती है, समय तो एक ऐसा प्रवाह है जो निरंतर बहता रहता है।

समय के इस प्रवाह में यदि कहने के समय कोई क्रिया घटित होती है तो वह उसका वर्तमान काल के लाता है

कथन से पूर्व जो कुछ भी घटित हुआ है वह भूतकाल समय कहलाएगा, तथा कथन के बाद जो कुछ घटित होगा वह भविष्य  समय कहलाएगा, इस प्रकार से काल और समय में बहुत ज्यादा अंतर होता है।

जैसा कि हम जानते हैं समय को भूत, वर्तमान तथा भविष्य तीन वर्गों में बांटा जाता है।

उसी के आधार पर काल को भी परंपरागत व्याकरण में वर्तमान काल, भूतकाल तथा भविष्यत काल तीन वर्गों में बांट दिया जाता है।

काल के साथ लिंग, वचन का संबंध भी होता है जो कि कर्ता का किसी वाक्य में संबंध बताते हैं।

किसी वाक्य का कर्ता कौन से लिंग का है तथा कौन से वचन का है इसका निर्धारण भी कई बार काल द्वारा किया जाता है जो कि इसके सबसे महत्वपूर्ण विशेषताओं में से एक मानी जाती हैं।

क्रिया पदबंध में मुख्य क्रिया को छोड़कर जो कुछ अन्य क्रियाएं होती है उन्हें सहायक क्रियाएं कहा जाता है इन सहायक क्रियाओं द्वारा कालो का निर्माण होता है।

जो कि इन्हें व्यक्त करने में सहायता करती हैं सहायक क्रियाओं द्वारा हमें यह भी पता चलता है कि कौन सा वाक्य किस काल का है।

तो आज के इस लेख में हमने हिंदी के एक महत्वपूर्ण विषय के पक्ष काल को देखा है, उसके प्रकारों को जाना है और साथ ही उनसे संबंधित अन्य रचनाओं को भी देखा है।

अगर आपको यह लेख पसंद आता है तो हमारे कमेंट बॉक्स में अपने विचारों को जरूर प्रस्तुत करिएगा ताकि आगे आने वाले समय में इसी प्रकार के लेख हम आपके लिए लाते रहे।


Conclusion

इस ब्लॉग लेख में आपने  के Kal ke Kitne Bhed Hote Hain बारें में जाना। आशा करते है आप काल के कितने भेद होते है और काल की परिभाषा की पूरी जानकारी जान चुके होंगे।

अगर आपका इससे संबन्धित किसी भी तरह का सवाल है तब नीचे कमेन्ट में पूछ सकते है जिसका जवाब जल्द से जल्द दिया जायेगा।

आपको लगता है कि इसे दूसरे के साथ भी शेयर करना चाहिए तो इसे सोश्ल मीडिया पर सबके साथ इसे साझा अवश्य करें। शुरू से अंत तक इस लेख को पढ़ने के लिए आप सभी का तहेदिल से शुक्रिया…

 

Leave a Comment